19एमएनपी-30-करहल चौराहा स्थित वाटर वक्र्स में खड़ा कैटिल कैचर वाहन
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मैनपुरी। नगर पालिका की लापरवाही से शहर के लोगों की जान खतरे में पड़ रही है। सड़क पर घूम रहे जानवरों से शहर के लोगों को खतरा बढ़ता ही जा रहा है। आधा शहर बंदरों के उत्पात से परेशान है। बंदरों को पकड़ने की जगह पालिका संसाधन न होने का राग अलापने के साथ ही वन विभाग पर ठीकरा फोड़ देती है। पालिका ने कैटिल कैचर को इस्तेमाल करने की जगह उसे फॉगिंग वाहन बना दिया है।
पालिका कैटिल कैचर वाहन न होने की बात कहती है। साथ ही वन विभाग के कार्रवाई न करने की भी बात कहती है। जबकि हकीकत ये है कि सालों से पालिका के पास कैटिल कैचर वाहन है। इस वाहन को इसी उद्देश्य से मंगाया गया था कि सड़क पर घूम रहे पशुओं को पकड़ने में इससे मदद मिलेगी, लेकिन इसे पालिका ने अब फॉगिंग वाहन के रूप में बदल दिया है।
जिम्मेदार हमेशा ही जनता की मजबूरियों का फायदा उठाते हैं। हाल ये है कि रोजाना बंदर लोगों को निशाना बना रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
सुरेंद्र सिंह।
नगर पालिका अगर बंदर पकड़वा नहीं सकती है तो कम से कम मजबूती के साथ प्रशासन को तो कह सकती है। इस पर प्रशासन को भी ध्यान देना चाहिए।
नीतीश यादव।
अगर नगर पालिका के पास कैटिल कैचर वाहन है तो पालिका बंदर क्यों नहीं पकड़वा रही है। हां अगर जरूरत है तो वन विभाग की मदद भी ली जाए।
उपेंद्र कुमार।
कई सालों से लोग बंदरों से जूझ रहे हैं। सैकड़ों लोग घायल हुए, लेकिन जनता की जान सस्ती है इसलिए कोई भी इस पर सुनवाई नहीं करता है।
मोहन सिंह।
पालिका के पास प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं हैं। ऐसे में बंदरों को पकड़ना संभव नहीं है। वन विभाग की मदद से कुछ न कुछ समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
-लालचंद्र भारती, ईओ नगर पालिका।