सवाल जिनके नहीं मिले जवाब
- ऑक्सीजन आपूर्ति करने वाले वेंडर ने 25 अप्रैल रात 2 बजे अस्पताल संचालक को फोन क्यों किया।
- वीडियो में संचालक ने क्यों कहा, मोदी नगर ड्राई हो गया है, मुख्यमंत्री भी ऑक्सीजन नहीं मंगवा सकते।
- ऑक्सीजन सिलिंडर मंगाने को डॉ. अरिन्जय ने सबसे बड़ा प्रयोग क्यों बताया, कितने सिलिंडर मंगाए।
- क्या वीडियो सामने नहीं आता तो कोई मानता कि अस्पताल में सुबह मॉकड्रिल की गई होगी।
- जांच में जिन 16 मरीजों की मृत्यु की पुष्टि हुई है क्या वह उस हाई फ्लो ऑक्सीजन पर निर्भर नहीं थे।
- निजी कोविड अस्पतालों को उन दिनों अपने गेट ‘नो ऑक्सीजन, नो बेड’ के नोटिस क्यों चस्पा करने पड़े।
- रात में ऑक्सीजन टैंकर की लोडिंग-अनलोडिंग के लिए एक आला अधिकारी को स्वयं क्यों दौड़ना पड़ा था।
धौलपुर से मंगाया था सिलिंडर
सुबह चार बजे ही अस्पताल से फोन आ गया। ऑक्सीजन नहीं है। शहर में ऑक्सीजन नहीं मिली। मैंने अपने रिश्तेदार से धौलपुर से एंबुलेंस से ऑक्सीजन सिलिंडर मंगाया। छह हजार रुपये एंबुलेंस को दिए थे। फिर भी मैं अपनी पत्नी को नहीं बचा सका। उसे अस्पताल ने पहले ही मार दिया था। हमें शाम को खबर दी। - नत्थीलाल त्यागी, मधु नगर
फतेहाबाद से मंगाया था सिलिंडर
हमारे पास सुबह पांच बजे अस्पताल से फोन आया था। ऑक्सीजन सिलिंडर लाने को कहा। 12 बजे फतेहाबाद से 10 हजार रुपये का सिलिंडर लेकर अस्पताल में दिया। शाम को मेरी ननद मीना ग्रोवर की मौत हो गई। ऑक्सीजन तो सिर्फ बहाना था, अब मुझे लगता है उनकी मृत्यु सुबह ही हो चुकी होगी। - गीतिमा ग्रोवर, दयालबाग
मैं लेकर आया था दो सिलिंडर
- मेरे पिता और भाई की बहू भर्ती थी। मुझे सुबह ही अस्पताल से फोन आया। ऑक्सीजन लाने को कहा। मैं प्रशासन के बफर स्टॉक से दो सिलिंडर लेकर गया था। वो सिलिंडर इस्तेमाल नहीं किए। सिलिंडर देने के बाद संचालक ने कहा, हमारे तुम्हारे मरीज को बचा नहीं सके। - अशोक चावला, जीवनी मंडी
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