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श्री पारस अस्पताल मामला: ऑक्सीजन संकट पर फिर बहस शुरू, पर्याप्त थी ऑक्सीजन तो क्यों मंगाए तीमारदारों से सिलिंडर?

Wed, 30 Jun 2021 11:09 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

प्रशासन ने कह रहा है कि भर्ती मरीजों के लिए ऑक्सीजन पर्याप्त थी। ऐसे में दोनों तरफ से विरोधाभास है।
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पारस अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पांच मिनट की मॉकड्रिल से विवादों में आए श्री पारस अस्पताल को जांच रिपोर्ट में क्लीनचिट मिलने से एक बार फिर ऑक्सीजन संकट पर बहस शुरू हो गई है। पीड़ित चीख-चीख कर कह रहे हैं कि उन्हें ऑक्सीजन के लिए दर-दर भटकना पड़ा। ऑक्सीजन कमी से उनके स्वजनों की मौत हो गई। दूसरी तरफ  प्रशासन ने कह रहा है कि भर्ती मरीजों के लिए ऑक्सीजन पर्याप्त थी। ऐसे में दोनों तरफ से विरोधाभास है। सात जून 2021 को वायरल वीडियो में श्री पारस अस्पताल के मालिक डॉ. अरिन्जय जैन ने ऐसी बातें कबूलीं जिन्हें सुनकर मानवता शर्मसार हो गई।

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26 अप्रैल की सुबह पांच मिनट की मॉकड्रिल की गई। जिसके बारे में डॉ. अरिन्जय ने वीडियो में कह रहे हैं, ये बात किसी को नहीं मालूम थी। डॉ. अरिन्जय ने वीडियो में तीमारदारों से ऑक्सीजन सिलिंडर मंगाने को सबसे बड़ा प्रयोग बताया था। प्रशासनिक जांच रिपोर्ट में भी इसका जिक्र करते हुए कहा गया है कि तीमारदार अपने सिलिंडर लेकर अस्पताल पहुंचे। प्रशासन ने जांच में 315 सिलिंडर आपूर्ति की बात कही है। उस दिन 96 मरीज भर्ती बताए। जिनमें 22 गंभीर थे। हाई फ्लो ऑक्सीजन पर निर्भर थे।

हाई फ्लो पर तीन घंटे चल सकता है एक सिलिंडर
- अगर हाईफ्लो पर गंभीर मरीज को 10 से 12 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन दी जा रही थी तो एक सिलिंडर तीन घंटे चल सकता है।
- करीब 90 से 100 सिलिंडर 24 घंटे में 22 मरीजों पर खप जाते। 
- 48 घंटे में 180 सिलिंडर की खपत सिर्फ गंभीर मरीजों पर होती। 
- प्रशासन के अनुसार अस्पताल में 74 मरीज और भर्ती थे। जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत रही होगी। ऐसे में प्रशासन पर जांच रिपोर्ट में लीपापोती के आरोप लग रहे हैं। 
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- सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब शहर में ऑक्सीजन का संकट था तो श्रीपारस में ऑक्सीजन कैसे पर्याप्त हो सकती है। 
- ऑक्सीजन कमी नहीं थी तो तीमारदारों से अस्पताल ने सिलिंडर क्यों मंगाए गए। 
(जैसा के चिकित्सा मामलों के विधि विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र गुप्ता ने बताया)

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सवाल जिनके नहीं मिले जवाब
- ऑक्सीजन आपूर्ति करने वाले वेंडर ने 25 अप्रैल रात 2 बजे अस्पताल संचालक को फोन क्यों किया।
- वीडियो में संचालक ने क्यों कहा, मोदी नगर ड्राई हो गया है, मुख्यमंत्री भी ऑक्सीजन नहीं मंगवा सकते।
- ऑक्सीजन सिलिंडर मंगाने को डॉ. अरिन्जय ने सबसे बड़ा प्रयोग क्यों बताया, कितने सिलिंडर मंगाए।
- क्या वीडियो सामने नहीं आता तो कोई मानता कि अस्पताल में सुबह मॉकड्रिल की गई होगी।
- जांच में जिन 16 मरीजों की मृत्यु की पुष्टि हुई है क्या वह उस हाई फ्लो ऑक्सीजन पर निर्भर नहीं थे।
- निजी कोविड अस्पतालों को उन दिनों अपने गेट ‘नो ऑक्सीजन, नो बेड’ के नोटिस क्यों चस्पा करने पड़े।
- रात में ऑक्सीजन टैंकर की लोडिंग-अनलोडिंग के लिए एक आला अधिकारी को स्वयं क्यों दौड़ना पड़ा था।

धौलपुर से मंगाया था सिलिंडर
सुबह चार बजे ही अस्पताल से फोन आ गया। ऑक्सीजन नहीं है। शहर में ऑक्सीजन नहीं मिली। मैंने अपने रिश्तेदार से धौलपुर से एंबुलेंस से ऑक्सीजन सिलिंडर मंगाया। छह हजार रुपये एंबुलेंस को दिए थे। फिर भी मैं अपनी पत्नी को नहीं बचा सका। उसे अस्पताल ने पहले ही मार दिया था। हमें शाम को खबर दी। - नत्थीलाल त्यागी, मधु नगर

फतेहाबाद से मंगाया था सिलिंडर
हमारे पास सुबह पांच बजे अस्पताल से फोन आया था। ऑक्सीजन सिलिंडर लाने को कहा। 12 बजे फतेहाबाद से 10 हजार रुपये का सिलिंडर लेकर अस्पताल में दिया। शाम को मेरी ननद मीना ग्रोवर की मौत हो गई। ऑक्सीजन तो सिर्फ  बहाना था, अब मुझे लगता है उनकी मृत्यु सुबह ही हो चुकी होगी। - गीतिमा ग्रोवर, दयालबाग

मैं लेकर आया था दो सिलिंडर
- मेरे पिता और भाई की बहू भर्ती थी। मुझे सुबह ही अस्पताल से फोन आया। ऑक्सीजन लाने को कहा। मैं प्रशासन के बफर स्टॉक से दो सिलिंडर लेकर गया था। वो सिलिंडर इस्तेमाल नहीं किए। सिलिंडर देने के बाद संचालक ने कहा, हमारे तुम्हारे मरीज को बचा नहीं सके। - अशोक चावला, जीवनी मंडी
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