आगरा। पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में धूल नियंत्रण के इंतजाम ही धूल फांक रहे हैं। ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रेप) फेल है। डीएम के आदेश को हवा में उड़ाते हुए बोदला-बिचपुरी रोड पर डिवाइडर निर्माण में लापरवाही बरती जा रही है। सड़क पर बिना ढकी निर्माण सामग्री वाहनों के पहियों से उड़ रही है। जगह-जगह फैक्टरियों से निकली काली राख, बालू, सीमेंट, पत्थर-गिट्टी के अलावा कूड़ा-कचरा के ढेर लगे हुए हैं।
ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण उद्योग-धंधों पर रोक लगा रखी है। वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रेप लागू कर रखा है, जिसके तहत तमाम तरह की बंदिशें हैं लेकिन, लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार रविवार को ग्रेप के प्रतिबंधों का मखौल उड़ाते नजर आए।
एमजी रोड-2 घोषित बोदला से बिचपुरी फाटक तक 20 से अधिक जगह निर्माण सामग्री खुली पड़ी है। कलवारी मोड़ पर काली राख और बालू, मिटटी, सीमेंट, पत्थर-गिट्टी के ढेर लगे हुए हैं। धूल की रोकथाम के उपाय नहीं हुए। उधर, एमजी रोड पर भगवान टॉकीज से प्रतापपुरा तक मेट्रो निर्माण ने वायु प्रदूषण मापने के लिए यंत्र नहीं लगाए। धूल नियंत्रण के उपायों के नाम पर खानापूर्ति हो रही है।
उधर, हाईवे पर भी हवा की हालत खराब है। खंदारी, आईएसबीटी से लेकर सिकंदरा तक मेट्रो निर्माण से जाम और धूल उड़ रही है। सुल्तानगंज पुलिया मोड़ पर भी यही हालात हैं। इन रास्तों से रोज एक लाख से अधिक लोग गुजरते हैं। धूल के महीन कण सांस लेने पर नाक के रास्ते फेफड़ों में जहर बनकर घुल रहे हैं। जीरियाट्रिक सोसाइटी की रिपोर्ट के अनुसार 40 प्रतिशत बुजुर्गों में फेफड़ों का संक्रमण मिल रहा है। बच्चे और गर्भवतियों के लिए भी इन मार्गों पर सांस लेना हानिकारक है।
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प्रदूषण बोर्ड ही दे रहा प्रदूषण को निमंत्रण
- सात दिसंबर को जिलाधिकारी अरविंद बंगारी ने ग्रेप की समीक्षा के दौरान क्षेत्रीय अधिकारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) अमित कुमार को प्रदूषण फैलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई और जुर्माना के निर्देश दिए थे। प्राथमिकी दर्ज कराने को कहा था। डीएम के आदेश भी धूल की तरह हवा में उड़ गए। निर्देशों का सात दिन बाद भी यूपीपीसीबी, मेट्रो, पीडब्ल्यूडी और नगर निगम ने धज्जियां उड़ा दीं। प्रदूषण बोर्ड की लापरवाही ही प्रदूषण को निमंत्रण दे रही है।
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पानी का छिड़काव, सफाई, कार्रवाई सब बंद
- निर्माण स्थलों पर पानी का छिड़काव, कूड़ा-कचरा व धूल की सफाई, पर्यावरण क्षतिपूर्ति पर जुर्माना व अन्य कार्रवाई सब बंद हैं। एमजी रोड पर डिवाइडर से पेड़ उखाड़ने पर सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी ने मेट्रो अधिकारियों को फटकार लगाई थी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने एडीए उपाध्यक्ष, डीएफओ, मेट्रो प्रोजेक्ट डायरेक्टर को तलब किया था। फिर भी वायु प्रदूषण नियंत्रण के इंतजाम शहर में फांक रहे हैं। वहीं इस संबंध में डीएम अरविंद एम बंगारी का कहना है कि मजिस्ट्रेट से सत्यापन कराएंगे। लापरवाह विभाग और अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा।