कासगंज। विद्युत निगम ने उपभोक्ता को एक लाख रुपये से अधिक का बिल भेज दिया, जब बिल संशोधित करने को कहा गया तो न तो बिल ही संशोधित किया गया और न ही निगम के अधिकारी स्थायी लोक अदालत में उपस्थित हुए। न्यायालय ने एक पक्षीय फैसला सुनाते हुए उपभोक्ता के पक्ष में 49161 रुपये भुगतान के आदेश विद्युत निगम को दिए हैं।
शहर के सोरोंजी गेट, यादव नगर निवासी पिंकी यादव ने दिसंबर माह में एक प्रार्थना पत्र स्थायी लोक अदालत में प्रस्तुत किया। इसमें बताया कि विद्युत निगम ने उन्हें 1 लाख 16 हजार रुपये का गलत बिल भेज दिया। बिल संशोधन करने का आश्वासन देकर 69400 रुपये और अतिरिक्त शुल्क के रूप में 600 रुपये जमा करा लिए गए पर उसके बाद भी बिल संशोधित नहीं किया गया। बताया कि उनके द्वारा कुल 107698 रुपये वर्ष 2019 में जमा किए गए। जबकि वर्ष 2020 में 191073 रुपये बकाया दर्शाते हुए विद्युत कनेक्शन विच्छेदित कर दिया गया। इस दौरान करीब 30 हजार रुपये अतिरिक्त विद्युत निगम पर जमा हो गया।
अदालत ने इस मामले में सुनवाई की तो विद्युत निगम ने जवाब की तारीख पर उपस्थित होकर समझौते से असहमति जता दी। अग्रिम तारीखों पर विभाग के अफसर साक्ष्य लेकर नहीं पहुंचे। इस पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष चंद्रशेखर प्रसाद, बसंत शर्मा और डॉ. सपना अग्रवाल की पूर्णपीठ ने निगम को आदेश दिए हैं कि 41161 रुपये 12 प्रतिशत ब्याज सहित वादी के पक्ष में बनते हैं। 8000 रुपये क्षतिपूर्ति सहित कुल 49161 रुपये का भुगतान विद्युत निगम उपभोक्ता के पक्ष में स्थायी लोक अदालत में जमा करे।
नहीं तो वसूली करेगा न्यायालय
न्यायालय ने विद्युत निगम को आदेश दिए हैं कि 15 दिन में धनराशि न्यायालय के खाते में जमा करना सुनिश्चित करें। यदि ऐसा न हुआ तो पीड़ित को अधिकार होगा की वह निर्धारित की गई धनराशि मय वार्षिक 12 प्रतिशत ब्याज भुगतान के साथ न्यायालय प्रक्रिया से वसूल करे।
- न्यायालय की नियत तारीख पर विद्युत निगम के अफसरों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। पीड़िता विद्युत निगम से परेशान थी। तथ्यों के आधार पर स्थायी लोक अदालत ने यह फैसला सुनाया है।- बसंत शर्मा, सदस्य, स्थायी लोक अदालत।