आगरा। मारपीट व अन्य धाराओं के मामले में न्यू आगरा थाने की पुलिस तीन साल में भी आरोप पत्र प्रस्तुत नहीं कर पाई। इस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मृत्युंजय श्रीवास्तव ने तत्कालीन उपनिरीक्षक अभिषेक तिवारी को आदेशों की अवहेलना और जानबूझकर न्याय कार्य में बाधा डालने का दोषी माना है। पुलिस आयुक्त आदेश दिए कि वह उपनिरीक्षक को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करें।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने यह भी कहा है कि सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारी से मुकदमे की जांच कराकर स्पष्ट आख्या व आरोप पत्र प्रस्तुत करें। 20 फरवरी को दंड के आदेश पर सुनवाई की जाएगी। थाना न्यू आगरा में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, फतेहाबाद के जमुना गली निवासी सतीश अखिलेश तिवारी ने 20 जनवरी 2022 को सारंगपुर निवासी मानसी त्यागी के खिलाफ मारपीट व अन्य आरोपों में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
बुधवार को अखिलेश तिवारी के अधिवक्ता ने न्यायालय को अवगत कराया कि तीन साल बाद भी पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल नहीं किया है। न्यायालय ने पूर्व में तत्कालीन थानाध्यक्ष न्यू आगरा के विरुद्ध कार्रवाई भी की थी, जिसके बाद थानाध्यक्ष के विरुद्ध संज्ञान लिया गया। 28 जनवरी 2025 को डीसीपी सिटी कार्यालय को पत्र प्रेषित किए गए थे। इसके बाद भी आख्या प्रस्तुत नहीं की गई।
उपनिरीक्षक नितिन यादव ने 3 अक्तूबर 2023 को अवगत कराया था कि 14 अप्रैल 2022 को आरोप पत्र प्रेषित किया गया था। बार-बार पत्र लिखकर और नोटिस देने पर थानाध्यक्ष न्यू आगरा ने बताया कि तत्कालीन थानाध्यक्ष बसई अरेला ने निर्देश जारी किया है कि उपनिरीक्षक अभिषेक तिवारी को तलब किया जाए। न्यायालय ने अभिषेक तिवारी को बुलाया।
अभियोजन अधिकारी ने बताया कि बीती 30 जनवरी को उपनिरीक्षक के खिलाफ नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद न तो उन्होंने कोई जवाब दिया और न ही वे न्यायालय में उपस्थित हुए। टेलीफोन पर संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि वह लखनऊ में हैं और उनके पास समय नहीं है। इस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मृत्युंजय श्रीवास्तव ने अपने आदेश में लिखा कि उपनिरीक्षक अभिषेक तिवारी जानबूझकर न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। पिछले तीन सालों से वादी न्याय के लिए न्यायालय के चक्कर काट रहा है।