सपा सांसद ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) एवं सीबीआई द्वारा जो अपराध पंजीकृत कराए गए हैं, उनमें से 95 प्रतिशत केस प्रतिपक्ष के नेताओं के खिलाफ पंजीकृत हुए हैं। 7 अगस्त को माननीय उच्चतम न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि ईडी ठग जैसा व्यवहार नहीं कर सकती, आपकी यह बाध्यता है कि आपको कानून के दायरे में काम करना होगा।
सपा सांसद ने कहा कि राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में सरकार ने जवाब दिया है कि पिछले 10 वर्षों में 193 प्रतिपक्ष के नेताओं पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुकदमे पंजीकृत किए, जिसमें सिर्फ दो लोगों पर ही दोष सिद्ध हुआ है। इसका सीधा मतलब यह है कि आर्थिक अपराधों में पंजीकृत मुकदमों में सजा का औसत सिर्फ एक प्रतिशत है। मोदी सरकार ईडी, सीबीआई का इस्तेमाल अपने प्रतिद्वंदियों के खिलाफ करती है।
उन्होंने कहा कि इस विधेयक के मुताबिक अपराध पंजीकृत होते ही बगैर न्यायालय से सजा मिले ही उसे दोषी मान लिया जाएगा। केजरीवाल सरकार में लोकनिर्माण मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ आर्थिक अपराध में मुकदमा पंजीकृत हुआ था, स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद भी उनको 18 महीने तक जेल में रखा गया था। उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हुई थी और 4 वर्ष बाद 4 अगस्त 2025 को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दी और कहा कि सत्येंद्र जैन के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता।
सपा सांसद ने कहा कि आखिर सत्येंद्र जैन को हुए मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को क्षति पहुंचाने की जिम्मेदारी किसकी है? बेहतर होता कि इस विधेयक में यह भी प्रावधान होता कि यदि पंजीकृत मुकदमे में अपराध सिद्ध नहीं होता है तो प्रताड़ना के लिए जिम्मेदार सरकार और आला अफसर पर भी मुकदमा दर्ज कर उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
सपा सांसद ने कहा कि कि प्रतिपक्ष के 25 बड़े नेताओं के खिलाफ जिन पर आर्थिक अपराधों में मुकदमे चल रहे हैं, उन्हें भारतीय जनता पार्टी में शामिल कराया गया। 23 नेताओं को अपने दल के हित में उपयोगी मानकर उनके खिलाफ चल रहे मुकदमों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। असल में चुनी हुई सरकारों को अस्थिर करना, विपक्षी नेताओं को जेल में डालना, विपक्षी पार्टियों को तोड़ना ही इनका एकसूत्रीय कार्यक्रम है। मोदी सरकार निरंकुश है। इनका प्रत्येक कदम इनके तानाशाह होने की पुष्टि करता है।
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