लगातार कई बार ऐसा होने पर जब विभाग ने जानकारी जुटाई तो पता चला कि ऐसा तीन तहसीलों के ही केंद्र के डाटा में दर्ज होने के कारण हो रहा है। इस पर कृषि विभाग ने पत्राचार किया है। जिले में नई बनाई गई तीनों तहसीलों के ऑनलाइन होने के बाद ही इस समस्या का समाधान हो सकेगा।
एक ही नाम के गांवों से हो रहा भ्रम
जिले में कई गांव ऐसे हैं, जिनके नाम के गांव दूसरी तहसील क्षेत्र में भी हैं। ऐसे में केंद्र सरकार के डाटा में सभी तहसीलें दर्ज न होने से भ्रम की स्थिति हो जाती है। उदाहरण के लिए मानिकपुर ग्राम पंचायत भोगांव तहसील में भी है और करहल तहसील में भी। इसी तरह गड़ेरी मैनपुरी तहसील में भी है और कुरावली में भी। इससे पता ही नहीं चल पाता कि किस तहसील के गांव का पता दर्ज किया गया है।
बैंकों से भी मांगा है डाटा
कृषि विभाग ने इसके लिए बैंकों से भी किसानों का डाटा मांगा है। विभाग का मानना है कि किसानों के बैंक खाते में उनकी तहसील का नाम सही दर्ज होगा। इससे वे किसानों तक पहुंच सकेंगे। लगभग 15 हजार किसानों का डाटा मांगा गया है।
उप निदेशक कृषि के डीवी सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के डाटा संशोधन में तहसीलों के कारण समस्या आ रही है। केंद्र सरकार के डाटा में केवल पुरानी तीन तहसीलें ही दर्ज हैं। पत्राचार किया गया है, जल्द ही सभी तहसीलें केंद्र सरकार के डाटा में जुड़ने की उम्मीद है।