ताजमहल की शाही मस्जिद में शुक्रवार को नमाज अदा करने के लिए बाहर से कोई नहीं आया। आम जुमा में 400 से 500 लोग पहुंचते थे। कोरोना और लॉकडाउन के कारण आसपास के लोगों ने घरों से ही नमाज अदा की।
मस्जिद के इमाम सआदत अली ने चार कर्मचारियों के साथ नमाज अदा की। 1978 के बाद यह पहला मौका था जब जुमा पर ताज में बाहर से कोई नमाजी नहीं आया।
ताजमहल में लंबे समय वरिष्ठ संरक्षक सहायक रहे डॉ. आरके दीक्षित ने बताया कि 1971 में भारत-पाक युद्ध और 1978 में बाढ़ के समय ताज के गेट बंद रखे गए थे। तब भी जुमे की नमाज इमाम और कर्मचारियों ने ही अदा की थी।
सआदत अली ने बताया कि वो 20 साल से जुमे की नमाज अदा करा रहे हैं। उनसे पहले उनके वालिद थे। 1992 में कर्फ्यू के दौरान भी ताज बंद नहीं था, बाहर से नमाजी आए थे लेकिन इस बार मसला कोरोना का है। लोगों का इससे बचाव जरूरी है। लोगों ने घरों में ही नमाज अदा की।
ताजमहल में जुमा की ही नमाज होती है। आम लोगों के लिए ताजमहल में जुमा को प्रवेश की पाबंदी रहती है। आसपास के मुस्लिम जुमा की नमाज के लिए आते हैं। इमाम ने बताया कि पिछले जुमा को आठ-दस लोग आए थे।
92 के कर्फ्यू में भी इतने कम लोग नही आए थे
उधर, शाही जामा मस्जिद के इमाम सैयद इरफान उल्ला खां निजामी ने बताया कि जुमे की नमाज आज पहली बार केवल 12 लोगों के साथ अदा की। मौजूदा हाल में यह अच्छा है। लोगों ने घरों में नमाज अदा करके दुआएं कीं। 1992 में अयोध्या कांड में लगे कर्फ्यू के दौरान भी नमाज पढ़ने के लिए बड़ी संख्या में नमाजी आए थे। आज बीमारी के खात्मे की दुआ की गई।
घरों में की इबादत, कोरोना के खात्मे की दुआ
दरगाह मरकज साबरी के सज्जादानशीन रमजान अली शाह ने बताया कि लोगों ने अपने घरों में रहकर जुमे की नमाज अदा की और मुल्क को इस बीमारी से निजात दिलाने की दुआ की गई। जब तक बहुत जरूरी नहीं हो, लोग घरों से नहीं निकलें। इस बीमारी के खात्मे के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है।
50 से ज्यादा पुलिसवाले रहे तैनात
लोगों से घरों में ही नमाज अदा करने की अपील करने के लिए डीएम प्रभु एन सिंह, एसएसपी बबलू कुमार और कम से कम 50 पुलिसकर्मी मौजूद रहे। एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि जगह-जगह पर मुस्लिम समुदाय के प्रमुख लोगों से बातचीत कर ली गई थी। सभी साथ दे रहे हैं, नमाज घरों से ही पढ़ी गई।