आगरा जिला अस्पताल में भले ही सुविधाएं बढ़ाने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन हकीकत में चिकित्सकीय सेवाएं चौपट हैं। यहां मौसमी बीमारियों की दवाओं तक के लाले हैं। यहां आने वाले 2500 मरीजों का महज 14 तरह की दवाओं से इलाज किया जा रहा। मरीज को पर्चे पर लिखी दवाओं में से एक-दो ही मिल पा रही हैं।
डिजिटल एक्सरे की सुविधा बंद पड़ी है तो एंटी रैबीज वैक्सीन ही नहीं लग पा रही। मरीज मायूस लौट रहे हैं। एसआईसी डा. सुबोध कुमार का कहना है कि साल का 1.50 करोड़ रुपये का बजट है। 30 लाख ही आए थे। बाकी के बजट की मांग शासन से की है। जल्द दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
सर्द मौसम में जुकाम-खांसी के सबसे ज्यादा मरीज आ रहे हैं। ऐसे मरीजों के लिए खांसी-सर्दी के सीरप नहीं है। एलर्जी, खुजली की दवा नहीं आ रही। एंटीबायोटिक दवा के नाम पर सिर्फ एक उपलब्ध है। हृदय, ईएनटी, मधुमेह जैसी बीमारियों की दवाएं लंबे समय से नहीं है। मजबूरी में मरीज बाजार से दवा खरीद रहा है।