मैनपुरी। कोरोना काल में स्कूल और कॉलेज बंद हैं। प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर बेसिक शिक्षा विभाग भी बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई का दावा करता है। लेकिन सच्चाई कुछ और ही बयां करती है। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश विद्यार्थियों के अभिभावकों की आर्थिक स्थिति खराब है। घर में स्मार्टफोन नहीं हैं। ऐसे में छात्र-छात्राएं कैसे ऑनलाइन क्लास लें। जिले के चुनिंदा परिषदीय स्कूलों को छोड़े दें तो अन्य कहीं भी बच्चों को ये तक नहीं पता है कि ऑनलाइन पढ़ाई होती क्या है।
नहीं है मोबाइल
शिवसिंहपुर निवासी अशोक कुमार की पुत्री शिखा गांव के ही उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा छह की छात्रा है। जबकि शिवानी गांव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा चार की छात्रा है। दोनों छात्राओं से जब ऑनलाइन शिक्षा के बारे में जानकारी जुटाई गई तो उन्होंने कहा कि उनके घर में मोबाइल नहीं है। शिखा की मां कमलेश ने कहा कि पहले उन्हें मोबाइल तो दिया जाए तब पढ़ाई कराई जाए।
ऑनलाइन शिक्षा की नहीं जानकारी
शिवसिंहपुर निवासी कमलेश की पुत्री रुचिका गांव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा पांच की छात्रा है। प्रशांत कक्षा दो का छात्र है। रुचिका ने बताया कि उसकी मम्मी के पास स्मार्टफोन तो है, लेकिन उसे ऑनलाइन शिक्षा की कोई जानकारी नहीं है। उसे शिक्षकों ने भी इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी।
भाई काम पर ले जाता है फोन
शिवसिंहपुर निवासी योगेंद्र सिंह का पुत्र सुमंत गांव में के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा पांच का छात्र है जबकि पुत्री सोनम कक्षा दो की छात्रा है। सुमंत ने बताया कि उसके घर में फोन नहीं है। एक फोन है जो उसके भाई सचिन के पास रहता है। सचिन काम पर जाता है तो मोबाइल अपने साथ ले जाता है ऐसे में वह कैसे ऑनलाइन पढ़ाई करे।
देवर से मांगतीं मोबाइल
शिवसिंहपुर के राजेश कुमार का पुत्र अभिनव गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा छह का छात्र है जबकि आयुष गांव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा पांच का छात्र है। अभिनव की मां गुड्डी देवी ने बताया कि उनके घर में मोबाइल नहीं है। जब किसी से फोन करना होता है तो वह अपने देवर से मोबाइल मांगतीं हैं। बिना मोबाइल के पढ़ाई कैसे हो सकती है।
शासन के निर्देश पर सभी प्रधानाध्यापकों को व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से ऑनलाइन पढ़ाई के निर्देश दिए हैं। कोरोना महामारी के कारण विद्यालय बंद हैं। पाठ्य पुस्तकें भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। ऐसे में जो भी संभव है वह प्रयास किया जा रहा है। आगे विभाग और शासन के जो निर्देश होंगे उनका पालन किया जाए। जिन अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन हैं वह बच्चों की पढ़ाई में मदद करें।
विजय प्रताप सिंह, बीएसए