केस एक
10 वर्ष के बच्चे को मोबाइल पर गेम्स खेलने की लत लग गई। पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था। अकेले रहना चाह रहा था। माता-पिता के बैंक खाते का पिन पता कर लिया और गेम्स में रुपये लगाने लगा।
केस दो
22 साल का युवक गेमिंग का आदी हो गया। साथियों से बहाने बनाकर उधार लेने लगा। नौकरी छूट गई। घर वालों को पता चला तो उन्होंने कर्ज भरा। युवक को मानसिक स्वास्थ्य में दिखाया गया, उसकी काउंसलिंग की गई।
गेमिंग की आदत छुड़ाने के लिए परिवार को देना होगा समय
डॉ. दिनेश राठौर ने बताया कि गेमिंग की आदत छुड़ाने के लिए बच्चों और युवाओं के लिए परिवार को समय देना होगा। उसकी दिनचर्या को व्यस्त रखना होगा। दोस्तों के साथ समय बिताकर भी इस आदत से बाहर निकला जा सकता है। खेलकूद व अन्य गतिविधियों में शामिल होना चाहिए। जो लती हो गए हैं, उन्हें मनोचिकित्सक को दिखाना चाहिए। मनोचिकित्सक दवा देने के साथ काउंसलिंग करते हैं। मरीज, परिवार व मनोचिकित्सक के संयुक्त प्रयास से गेमिंग की आदत छुड़ाई जा सकती है।