थाना जगदीशपुरा के कबीर कुंज में दुधारू पशुओं को लगने वाले प्रतिबंधित दवा के नकली इंजेक्शन बनाते हुए एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया। नकली इंजेक्शन केमिकल और एसिड से तैयार किए जा रहे थे। प्लास्टिक की शीशियों में भरकर बेचा जा रहा था। केमिकल के ऑक्सीटोसिन होने की आशंका पर सैंपल लिया गया।
इंस्पेक्टर थाना जगदीशपुरा ने बताया कि अभियुक्त नई आबादी, कबीर कुंज निवासी गुलफाम है। गुरुवार देर रात पुलिस ने ड्रग इंस्पेक्टर रमेश चंद्र यादव के साथ गुलफाम के घर में छापा मारा। गुलफाम को पकड़ लिया गया। उसने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वह पशुओं से ज्यादा दूध निकालने के लिए दिए जाने वाले इंजेक्शन को केमिकल मिलाकर तैयार करता है। इस केमिकल को शीशियों में भरता है। उस पर कोई लेवल भी नहीं लगाता। पुलिस ने मौके से 100 एमएल की तकरीबन 506 शीशियां केमिकल से भरी बरामद कीं। ड्रग इंस्पेक्टर ने 16 शीशियों का सैंपल लिया। उन्हें जांच के लिए लखनऊ स्थित लैब में भेजा जाएगा। इसके अलावा सफेद कट्टी में केमिकल, एक बोरे में पैकिंग कवर, चार बोरों में भरीं 100 एमएल की खाली शीशियां बरामद कीं। गुलफाम केमिकल की खरीद से संबंधित दस्तावेज नहीं दिखा सका। इंस्पेक्टर का कहना है कि केमिकल के प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन होने की आशंका है। आरोपी नकली को असली इंजेक्शन के नाम पर लोगों को बेच देता है।
कलकत्ता से लाता है केमिकल
इंस्पेक्टर के मुताबिक, आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह केमिकल को कलकत्ता से मंगवाता है। वहां के सप्लायरों के खाते में रकम जमा करता है। सप्लायर केमिकल को ट्रेन से आगरा भेज देते हैं। पांच लीटर केमिकल तकरीबन आठ हजार रुपये में मिलता है। इसके अलावा पांच लीटर एसिड को स्थानीय स्तर पर 1200 रुपये में खरीदता है। इसके बाद दोनों को मिलाने के बाद इंजेक्शन को तैयार करता है। सौ एमएल की एक शीशी 15 रुपये तक में बिक जाती है। पशुपालक उसे खरीदकर ले जाते हैं। यह आक्सीटोसिन का काम करता है।
हार्मोंस संबंधी बीमारियों का खतरा
एसएन मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग के डा. आशीष गौतम बताते हैं कि ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन किसी भी रूप में लोगों के साथ ही पशुओं के लिए भी हानिकारक है। ऐसे पशुओं का दूध पीने से लोग भी बीमार ग्रस्त हो सकते हैं। इससे हार्मोंस संबंधी बीमारियों का खतरा सर्वाधिक रहता है। महिलाएं बांझपन का शिकार हो सकती हैं। पुरुषों में नपुंसकता की समस्या हो सकती है। बच्चों में उम्र से पहले शारीरिक बदलाव आने शुरू हो जाते हैं। हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।