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Health News: मोटापा-धूम्रपान से मांसपेशियां कमजोर...20 की उम्र में हो रहा हर्निया, चिकित्सकों ने दी ये सलाह

Thu, 27 Nov 2025 08:37 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

लोगों में खराब फिटनेस से 20 से 45 साल की उम्र के 20 फीसदी मरीजों में हर्निया परेशानी देखने को मिल रही है। आदतों में सुधार न करने और फिटनेस ठीक नहीं होने से इसकी बार-बार सर्जरी की भी जरूरत पड़ रही है।
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कार्यशाला में माैजूद चिकित्सक। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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तला और फास्ट फूड खाने की लत कई बीमारियों की वजह बन रही है। मोटापा बढ़ने से मांसपेशियां भी कमजोर हो रही हैं। स्थिति यह है कि 20 साल की उम्र में भी हर्निया की दिक्कत हो रही है। फतेहाबाद रोड स्थित कन्वेंशन सेंटर में एसोसिएशन ऑफ मिनिमल एक्सेस सर्जंस ऑफ इंडिया (अमासी) की दो दिवसीय कार्यशाला में चिकित्सकों ने इस पर चिंता जताई। विशेषज्ञों ने बचाव के साथ सर्जरी की नई तकनीक के बारे में प्रशिक्षण भी दिया।
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मुख्य वक्ता अमासी के उपाध्यक्ष डाॅ. राजदीप सिंह ने बताया कि धूम्रपान में कई हानिकारक तत्व होते हैं। यह पेट की मांसपेशियों को कमजोर कर देती हैं। मोटे लोगों में वसा अधिक होता है। ये वसा पेट की मांसपेशियों में अतिसूक्ष्म छिद्रों में प्रवेश कर इसे कमजोर बना देती हैं। इससे ऊतक बाहर आने लगते हैं और हर्निया का रूप ले लेते हैं। सर्जरी में इसके 40 फीसदी मरीज हैं।

फास्टफूड, तला भोजन करने और खराब फिटनेस से 20 से 45 साल की उम्र के 20 फीसदी मरीजों में यह परेशानी मिल रही है। आदतों में सुधार न करने और फिटनेस ठीक नहीं होने से इसकी बार-बार सर्जरी की भी जरूरत पड़ रही है। डॉ. एचएल राजपूत ने ऑपरेशन थिएटर में मरीजों को होने वाले संक्रमण पर चिंता जताते हुए ओटी, सर्जरी उपकरण और मशीनों को मानकों के अनुसार सफाई की जरूरत बताई।
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इससे पहले मुख्य अतिथि डॉ. रंजना बंसल और डॉ. ज्ञान प्रकाश ने कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि सर्जरी की नई तकनीकी आ गई हैं। चिकित्सकों के इसमें पारंगत होने से मरीजों को लाभ मिल रहा है। कार्यशाला में डॉ. प्रशांत लवानियां, डॉ. समीर कुमार, डॉ. अनुभव गोयल, डॉ. करण रावत, डॉ. निसार हमदानी, डॉ. अभिनव मित्तल, डॉ. दीपिका चौबे, डॉ. निशा यादव आदि ने भी व्याख्यान दिए।
 
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फास्टफूड-तले भोजन से पित्त की थैली की पथरी
दिल्ली के डॉ. अजय ठकराल ने बताया कि पित्त की थैली में पथरी के मरीजों की संख्या बीते एक दशक में दोगुनी हो गई है। सर्जरी में 60 फीसदी इसके ही मरीज आ रहे हैं। इसकी बड़ी वजह तला भोजन और फास्टफूड है। इससे गाढ़ा तरल पदार्थ पित्त की थैली में पहुंचकर पथरी को जन्म देता है। इसमें महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पानी कम पीने से भी यह स्थिति बढ़ रही है।

डायग्नोस्टिक लेप्रोस्कोपी से चिह्नित होंगी बीमारी
दिल्ली के डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि कई बार सीटी स्कैन, एमआरआई तक से भी पेट की बीमारियां चिह्नित नहीं हो पाती हैं। मरीज लंबे समय तक उपचार कराते हुए परेशान हो जाते हैं। ऐसे में डायग्नोस्टिक लेप्रोस्कोपी से ऐसी बीमारियों को आसानी से चिह्नित कर सकते हैं। इसमें 5 एमएम के छिद्र से दूरबीन से पेट के अंदर ऐसे संक्रमित हिस्से को चिह्नित कर लेते हैं। इससे मरीज का इलाज या जरूरत पर सर्जरी कर सकते हैं। इससे मरीजों को बीमारी से मुक्ति मिल जाती है।

डॉक्टरों ने लोगों को ये दी सलाह
- नियमित 10 हजार कदम तेज गति से चलें।
- रोजाना 3 लीटर पानी जरूर पीएं।
- फास्ट फूड, बाजार के भोजन से पेट न भरें।
- धूम्रपान-एल्कोहल से बचें, शरीर फिट रखें।

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