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सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की नहीं होगी कमी, UP सरकार ने निकाला ये फार्मूला

Mon, 19 Feb 2018 08:14 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने एसएन मेडिकल कॉलेज का किया निरीक्षण - फोटो : अमर उजाला
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चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों की कमी पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार नए फार्मूले पर कार्य कर रही है। 
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सरकारी मेडिकल कालेजों से पास आउट डाक्टरों को एक साल के लिए सरकारी अस्पतालों में सेवा देना जरूरी होगा। छात्रों से प्रवेश के वक्त ही इस संबंध में बांड भरवाया जाएगा। 

अागरा के सर्किट हाउस में मीडिया से मुखातिब चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने बताया कि एक डाक्टर बनाने में सरकार लाखों रुपये खर्च करती है। ऐसे में इनका भी समाज के प्रति दायित्व बनता है। इस योजना से हर साल दो हजार डाक्टर मिलेंगे। 
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प्राइवेट मेडिकल कालेज से पास आउट डाक्टरों पर ये व्यवस्था लागू नहीं होगी। क्यों के सवाल, पर उन्होंने कहा कि प्राइवेट में छात्रों को मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है। 

उन्होंने बताया कि सरकार चिकित्सा शिक्षकों के रिटायरमेंट की आयु 65 से 70 साल करने जा रही है। इससे मेडिकल की पढ़ाई के लिए अनुभवी शिक्षकों की कमी नहीं होगी। 

नए डाक्टर बनाने के लिए मेडिकल कालेजों में सीटें भी बढ़ाई जाएंगी। फिरोजाबाद समेत प्रदेश में सात नए मेडिकल कालेज भी खोले जा रहे हैं। 
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कराया गया है ऑडिट

अस्पतालों में सुधार की कवायद पर उन्होंने बताया कि सीनियर डाक्टर की अगुवाई में प्रदेश के सभी 13 मेडिकल कालेज में चिकित्सा शिक्षा और सुविधाओं के लिए ऑडिट कराया गया है। 

इनकी रिपोर्ट पर कार्य करने के लिए शासन ने मेडिकल एजूकेशन स्ट्रेटजी सेल बनाया है, जिसका कैंप कार्यालय लखनऊ में खोला गया है। 

ऑडिट रिपोर्ट पर उन्होंने ने बताया कि आगरा, झांसी, गोरखपुर, इलाहाबाद, मेरठ और कानपुर मेडिकल कालेज में सबसे खराब हालात मिले हैं। इनमें सबसे पहले सुधार कराया जाएगा। 
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