मैनपुरी। लॉकडाउन से बैंकों को बड़ा झटका लगा है। तीन माह तक ऋण की किस्त चुकाने की छूट के बाद चौथे महीने भी ऋण जमा नहीं किए गए। इससे विभिन्न योजनाओं के 90 प्रतिशत ऋण में वसूूली नहीं हो पा रही है। इनमें से 70 प्रतिशत खाते एनपीए हो चुुके हैं।
शासन द्वारा लोगों को रोजगार देने के लिए बैंकों से ऋण उपलब्ध कराने की योजनाएं संचालित हैं। इनमें मुख्य रूप से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, खादी ग्रामोद्योग ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड प्रमुख हैं। इन योजनाओं के तहत बैंकों ने बीते वित्तीय वर्ष में करीब 75 हजार लोगों को 550 करोड़ रुपये का ऋण दिया। लेकिन इसकी वसूली करना अब विभाग के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है। लॉकडाउन ने मुसीबत और भी बढ़ा दी है। पहले से ही जहां फरवरी में 50 हजार खाते एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स) हो गए थे तो वहीं अब ये ऋण न चुकाने वालों की संख्या 64 हजार पहुंच गई है। इन पर विभाग का लगभग 450 करोड़ रुपये बकाया है। लॉकडाउन के दौरान तीन माह तक जहां ऋण न चुकाने की छूट दी गई थी तो वहीं जून में भी 90 प्रतिशत लोगों ने ऋण की किस्त जमा नहीं की। अब बैंक इनको नोटिस जारी करने की तैयारी कर रहा है।
ऐसे एनपीए होते हैं खाते
कोई भी खाता कब एनपीए होगा ये खाते के प्रकार पर निर्भर करता है। जानकारों के अनुसार प्रतिमाह जिस खाते की किस्त जमा की जाती है अगर उसमें तीन माह तक किस्त जमा न की जाए तो खाता एनपीए हो जाता है। वहीं किसान क्रेडिट कार्ड व किसान संबंधी अन्य योजनाओं का खाता फसल के बाद भी धनराशि जमा न करने पर छह माह में एनपीए होता है।
हाईलाइटर्स
-75 हजार कुल खाताधारकों को दिया गया ऋण
-50 हजार खाते हो गए एनपीए
-64 हजार लोगों ने चार माह से नहीं चुकाई किस्त
-450 करोड़ रुपये की है बकाएदारी
लॉकडाउन के दौरान तीन माह के लिए ऋण की किस्त में छूट दी गई थी। अब ऋण की किस्त जमा करना जरूरी है। इसमें लापरवाही खाताधारक के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है।
जोगिंद्र पाल, अग्रणी जिला प्रबंधक।