बुखार-खांसी न गले में खराश, लेकिन उल्टी-दस्त ठीक नहीं हो रहे। दवा भी ली, लेकिन पूरी तरह से आराम नहीं मिला। जब एसएन मेडिकल कॉलेज की ट्राएज ओपीडी में डॉक्टरों ने जांच कराई तो कोरोना वायरस की पुष्टि हुई। रोजाना ऐसे दो से तीन मामले मिल रहे हैं।
ट्राएज ओपीडी में रोजाना 350 मरीज रोज आ रहे हैं। इसमें बुखार-खांसी, बिना लक्षण वाले करीब 280 से अधिक मरीज हैं। उल्टी-दस्त के 10 से 15 मरीज होते हैं।
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चिकित्सक स्क्रीनिंग करते वक्त जानकारी करते हैं कि हॉटस्पॉट में रहते हो, किसी पॉजिटिव के संपर्क में तो नहीं आए, क्या कार्य करते हो, परेशानी कब से है। पूछताछ में संदिग्ध मरीज नजर आने पर पांच से आठ लोगों की कोरोना वायरस की जांच कराने पर दो-तीन मरीजों संक्रमित मिल रहे हैं।
ट्राएज ओपीडी प्रभारी डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि मरीज के दवा लेने पर भी जब उल्टी-दस्त ठीक नहीं होते तब अस्पताल आए। उल्टी-दस्त के मरीजों में संक्रमण की एक वजह यह भी है कि बाजार में स्टॉल पर बिना मास्क पहने ही लोग खानेपीने की सामग्री बेच रहे हैं और लोग वहीं खड़े होकर खा रहे हैं। संक्रमित के संपर्क में आए, लेकिन उनमें अन्य कोई और लक्षण नहीं दिखा, लेकिन उल्टी-दस्त बंद नहीं हुई।
कोरोना वायरस होने पर पेट हो सकता है खराब: डॉ. अजीत चाहर
एसएन कॉलेज में कोरोना वायरस के मरीजों का इलाज करने वाले वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अजीत चाहर ने बताया कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज का पेट खराब हो सकता है।
उसे जुकाम-खांसी और बुखार जैसे लक्षण भले ही न हों। ऐसे मरीज आ रहे हैं। जांच में उच्च रक्तचाप नियंत्रित नहीं होता तभी उनको भर्ती करते हैं, बाकी उन्हें होम आइसोलेशन में रहने की सीख दी जाती है।
उल्टी-दस्त हो तो रखें ध्यान
- बाजार के खाने से बचें, स्टॉल पर खड़े होकर न खाएं, पैक करके घर ही ले आएं।
- ओआरएस, नींबू-पानी, नारियल पानी पीएं, दिन में छह से आठ लीटर पानी पीएं।
- दाल का पानी पीएं, दलिया खाएं, चटपटे और चिकनाईयुक्त भोजन से बचें।
- उल्टी-दस्त होने पर चिकित्सक से परामर्श जरूर करते हुए दवा लें।