आगरा में एक साल पहले लाखों की लागत से आईसीएफ कोचों में बनाए गए 22 आइसोलेशन कोच को दोबारा साफ-सफाई के बाद तैयार कर दिया गया है। संक्रमण बढ़ने पर इन्हें राज्य सरकार के आदेश पर रेलवे उनके सुपुर्द कर देगा। उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक ने भी सभी मंडलों को इन कोचों को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।
कोरोना संक्रमण के पहले दौर में रेलवे ने हर मंडल में आइसोलेशन कोच तैयार किए थे। एक कोच पर लगभग दो लाख रुपये खर्च आया था। इन कोच में नौ बेड हैं। आगरा रेल मंडल में कैरिज एंड वैगन विभाग ने इन कोचों को तैयार किया था। तभी से ये कोच आगरा कैंट स्टेशन के कभी यार्ड लाइन में तो कभी प्लेटफार्म पर खड़े कर दिए जाते हैं। इनमें डस्टबिन से लेकर ड्रिप चढ़ाने का भी इंतजाम है।
अस्पतालों मेंं नहीं बची है जगह
पूरे देश में जिस तरह से संक्रमण बेकाबू होता जा रहा है और अस्पतालों में जगह नहीं बची है। ऐसे में रेलवे ने एक बार फिर से इन कोचों को साफ सफाई करवाना शुरू कर दिया है। रविवार को उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक विनय कुमार त्रिपाठी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आगरा, झांसी व प्रयागराज मंडलों में कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए किए जा रहे उपायों की समीक्षा की।
इस दौरान उन्होंने सभी मंडलों के अधिकारियों से कहा कि वह एक साल पहले तैयार करवाए गए आइसोलेशन कोचों को दोबारा से साफ सफाई करवाकर तैयार रखें, ताकि आवश्यकता पड़ने पर इन्हें राज्य सरकारों को दिया जा सके। इस संबंध में आगरा रेल मंडल से सीनियर डीसीएम आशुतोष सिंह ने बताया कि आगरा में 22 कोच हैं, जोकि सही हालत में हैं। आवश्यकता पड़ने पर इनका प्रयोग किया जा सकता है।
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