मांट टोल प्लाजा पर मथुरा पुलिस और एएनटीएफ की टीम द्वारा पकड़े ड्रग तस्कर गिरोह को पुलिस ने जेल भेजा है। इस गिरोह के सदस्य नूर अहमद को लेकर चौंकाने वाल सच सामने आया है। नूर दुबई में टैक्सी चलाता था, इसके बाद उसने तस्करी शुरू की।
यमुना एक्सप्रेस-वे के मांट टोल पर बुधवार रात पकड़े गए ड्रग तस्कर गिरोह को बृहस्पतिवार को पुलिस ने जेल भेज दिया। पूछताछ में पता चला है कि तस्करों का मुखिया नूर अहमद दुबई में टैक्सी चालक था, वहां उसकी बिहार के एक युवक से मुलाकात हुई। दोनों ने गिरोह का विस्तार किया और नेपाल से लेकर भारत में चरस तस्करी शुरू कर दी। नेपाल से एक लाख रुपये किलो चरस खरीदने के बाद गैंग भारत में इसे 10 से 15 गुना ऊंचे दामों पर बेचता है।
विज्ञापन
एसपी क्राइम अवनीश कुमार मिश्र व सीओ एएनटीएफ, आगरा इमरान खान ने बताया कि मो. शाहिद पुत्र मो. राशिद, नूर अहमद पुत्र मकसूद राजा, नूर आलम पुत्र सोहराब अहमद निवासीगण चमरौली, दरियाबाद, बाराबंकी और आबिद पुत्र जब्बीर अहमद निवासी टिकैत नगर, बाराबंकी को जेल भेज दिया है। इनसे 50 किलो से अधिक चरस बरामद हुई है। नूर अहमद गिरोह का मुखिया है। वह दुबई में टैक्सी चलाता था। वहां उसकी मुलाकात बिहार के नीरेंद्र नाम के युवक से हुई। दोनों का वहां मिलने वाले पैसों से गुजारा नहीं चल रहा था। इस पर ड्रग तस्करी करने का प्लान किया।
2021 में भारत आने के बाद आबिद को साथ में लिया और एक कार खरीदी। इसके बाद गिरोह में नूर आलम, मो. शाहिद को शामिल किया। नूर अहमद ने बताया कि वह नीरेंद्र के पास चंपारण में गाड़ी छोड़कर आ जाता था। चार से पांच दिन बाद नीरेंद्र उसे फोन कर बताता कि वह नेपाल से गाड़ी में चरस ले आया है। इसके बाद अन्य साथियों के साथ मिलकर वहां पहुंचता और गाड़ी व उसमें लदी चरस को पश्चिम उप्र सहित, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब में सप्लाई देने जाते। पकड़ी गई चरस को हरियाणा के कैथल जिले में सप्लाई करने जा रहे थे। हालांकि उसने कैथल के रिसीवर का नाम-पता नहीं बताया है।
नूर आलम और मो. शाहिद सऊदी अरब में करते थे नौकरी
नूर आलम और मो. शाहिद सऊदी अरब में नौकरी करते थे। दोनों ने भारत वापस आने के बाद ड्रग तस्करी शुरू की। यह गिरोह पिछले ढाई साल से तस्करी में लिप्त था।
एक माह से टीम लगी थी पीछे
सीओ एएनटीएफ इमरान खान ने बताया कि ड्रग तस्करों के पीछे उनकी टीम एक माह से लगी हुई थी। आरोपी चरस की बदबू को छिपाने के लिए गाड़ी में परफ्यूम डालकर रखते थे। इसके अलावा हाईवे-एक्सप्रेस-वे के जरिये ही माल को एक से दूसरे राज्य में लेकर जाते थे। नारकोटिक्स सेल ने इस गैंग को पकड़ने के लिए टोल प्लाजा पर संपर्क कर रखा था। गाड़ी संख्या पहले से मिली होने के कारण गैंग के मूवमेंट की जानकारी हो गई और मांट पुलिस की मदद से सभी को गिरफ्तार कर लिया।पूछताछ में यह भी सामने आया है कि दिल्ली में जी-20 की बैठक के कारण जांच सख्ती होने से आरोपी सप्लाई देने के लिए नहीं निकल रहे थे। एक सप्ताह तक सप्लाई को टाला गया था।
एक नेता के जरिये खरीदी थी कार
नूर अहमद ने बताया कि उसने व आबिद ने ड्रग तस्करी के लिए लखनऊ नंबर की कार को मिलकर खरीदा था। एक नेता के जरिये कार का सौदा हुआ था। यह गाड़ी किसी के पास गिरवी रखी हुई थी। सीओ इमरान खान ने बताया कि ड्रग तस्कर गैंग के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की जाएगी। इनके द्वारा अपराध से अर्जित की गई संपत्ति को सीज किया जाएगा। पुलिस इनसे संबंधित तहसीलों से चल, अचल संपत्ति का रिकॉर्ड निकलवा रही है। गिरफ्तार करने वाली टीम में इंस्पेक्टर एएनटीएफ आगरा पवन कुमार शर्मा, हेड कांस्टेबल आशीष शुक्ला, अवनीश कुमार, कांस्टेबल प्रेमनरायन, वसीम अकरम, प्रेमचंद्र कुमार, कृष्णदेव, नवीन कुमार, मुनेश कुमार, सर्विलांस टीम एएनटीएफ एसआई राजेश मिश्रा, हेड कांस्टेबल जुबैर खान, मांट इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार, एसआई धीरज कुमार, हेड कांस्टेबल राहुल देव, कांस्टेबल अंकित कुमार, संजय कुमार मलिक, आशुतोष भदौरिया शामिल रहे।