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स्नान पर्वों पर गंगा में नहीं बनाया जाता सुरक्षित स्नान के लिए घेरा

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कासगंज। जिले में गंगाघाट पर श्रद्धालुओं के सुरक्षित स्नान के लिए ठोस इंतजाम नहीं किए जाते, जिसके कारण गंगास्नान के पर्वों पर श्रद्धालुओं के डूबने के हादसे होते हैं। 30 मई को सोमवती अमावस्या का बड़ा गंगास्नान पर्व है। इस पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु अलग-अलग गंगाघाटों पर स्नान को पहुंचेंगे। पिछले बुद्ध पूर्णिमा के गंगास्नान पर्व के मौके पर चार श्रद्धालु अलग-अलग गंगाघाटों पर डूब गए थे।
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जिले में लहरा गंगाघाट, सहवाजपुर और कादरगंज तीन मुख्य गंगाघाट हैं, जबकि पड़ोसी जनपद बदायूं का मुख्य गंगाघाट कछला का है जो जिले की सीमा से सटा है। ऐसी स्थिति में इन सभी गंगाघाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगास्नान को पहुंचते हैं। कछला और कादरगंज गंगाघाटों पर श्रद्धालुओं का सर्वाधिक दबाव होता है। कछला पर तो बदायूं का प्रशासन जलस्तर बढ़ने पर बल्लियां और झंडियां लगाकर सुरक्षा घेरा बनाता है, लेकिन लहरा, कादरगंज और सहवाजपुर के घाटों पर सुरक्षा का यह घेरा नहीं बनाया जाता।
क्या बोले श्रद्धालु-
- स्नानपर्वों पर गंगाघाटों पर काफी भीड़ रहती है। गंगा की धारा में बदलाव होता रहता है। कहां पानी गहरा है इसका अंदाज नहीं लग पाता। इसके लिए नदी में संकेतक लगें हो तो श्रद्धालु गहरे पानी की ओर जाने से रोके जा सकते हैं। - शिवकुमार, सहावर।
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- गंगाघाट पर गंगास्नान करने के लिए घाट पर सुरक्षित स्थान चिह्नित करके संकेतक लगाने चाहिए। गहरे पानी की ओर लाल झंडी व बल्ली लगाकर रोक लगानी जरूरी है, जिससे हादसे न हो सकें। - चंद्रभान, तबालपुर।
क्या बोले प्रशासनिक अधिकारी
- गंगास्नान के लिए सुरक्षा के पहले से ही प्रबंध किए जाते हैं। इस बार और अधिक सतर्कता बरती जाएगी। तहसील प्रशासन को गंगा में गहरे पानी की ओर बल्ली और लाल झंडी के संकेतक लगाने के निर्देश दिए हैं। - हर्षिता माथुर, डीएम।
- गंगास्नान पर्व के मौके पर हर पर सुरक्षा के इंतजाम किए जाते हैं। घाटों पर गोताखोर भी सक्रिय किए जाते हैं, जिससे कोई श्रद्धालु डूबे तो उसे तत्काल मदद मिल सके। - रोहन प्रमोद बोत्रे, एसपी।
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