आगरा में जेल में बंद भाइयों को राखी बांधने पहुंची बहनें अव्यवस्था से बेहाल रहीं। राखी पर केंद्रीय कारागार में कोई इंतजाम नहीं थे। बहनों को जमीन पर बैठना पड़ा।
उत्तर प्रदेश के आगरा में रक्षाबंधन पर केंद्रीय कारागार में इस बार बहनों को अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ा। वो बंद भाइयों को राखी बांधने पहुंचीं थीं। परिसर में महिलाओं और बच्चों के बैठने के इंतजाम नहीं थे। पानी के लिए भी उन्हें भटकना पड़ा। पर्ची लगाने से जेल में प्रवेश करने तक घंटों इंतजार ने परेशानी बढ़ाई।
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केंद्रीय कारागार परिसर में गेट के पास ही टेंट लगाया गया था। टेबल लगाकर तीन कर्मचारी मुलाकात से संबंधित दस्तावेज ले रहे थे। इसके बाद एक कर्मचारी मुहर लगाने के लिए आवाज लगा रहा था। दूसरी जगह पर कतार लगाकर प्रवेश दिया जा रहा था।
बंदी सीटू के परिवार की महिलाएं और बच्चे अलीगढ़ से आए थे। उन्होंने बताया कि दोपहर 12 बजे आ गए थे। मगर, दो बजे तक नंबर नहीं आया। बैठने का इंतजाम नहीं था। फिरोजाबाद से आईं स्नेहलता ने बताया कि 11 बजे आ गई थीं। 1:30 बजे तक नंबर नहीं आया। गर्मी में परेशान होना पड़ा। कर्मचारी के आवाज लगाने पर धक्का-मुक्की हो रही थी।
शाम तक केंद्रीय कारोबार में 1700 से अधिक मुलाकाती पहुंचे, जिसमें 1174 महिलाएं और 364 बच्चे थे। उनका कहना था कि काउंटर पर भीड़ थी। मुहर लगाने के लिए कोई काउंटर नहीं था। कर्मचारियों की संख्या कम थी।
जेल अधीक्षक ओपी कटियार ने दावा किया कि जेल में उचित व्यवस्थाएं थीं। मगर, पिछले साल की अपेक्षा ज्यादा महिलाओं के आने से थोड़ी दिक्कत हुई। कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर समस्या दूर की गई।
इसी तरह जिला जेल में भी बहनों की भीड़ रही। मगर, यहां पर ऑनलाइन पर्ची के साथ सीधे आने वालों के लिए अलग से काउंटर था। पुलिस के साथ बंदीरक्षक तैनात रहे। इससे महिलाओं को समस्या नहीं हुई। जेल अधीक्षक हरिओम शर्मा ने बताया कि 978 बंदियों से मिलने के लिए 2360 महिलाओं और बच्चों ने मुलाकात की। उन्हें उचित स्थान पर बैठाकर राखी बांधने का अवसर दिया गया।