फार्मासिस्ट न होने और दवाओं के बिल न दिखाने पर ड्रग विभाग ने नौ मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। सात दिन में खामियां और मानक पूरे न करने पर इनके लाइसेंस को निरस्त दिया जाएगा।
ड्रग विभाग ने बीते महीने 12 मेडिकल स्टोरों पर निरीक्षण किया था। इनमें मौके पर फार्मासिस्ट नहीं मिले थे, सभी दवाओं के खरीद-फरोख्त के बिल नहीं दिखा पाए थे। इनके यहां से दवाओं की जांच के लिए नमूने भी लिए गए थे, जिनकी जांच अभी नहीं आई है। इन सभी स्टोर संचालकों को नोटिस देकर बिल मांगे थे।
रिमाइंडर पर भी कोई सुनवाई नहीं की। सहायक आयुक्त औषषि अखिलेश जैन ने बताया कि बिना फार्मासिस्ट के दवाएं बेचते हुए पकड़े जाने पर लाइसेंस निलंबित होगा। दवाओं के खरीदने और बेचने के सभी बिल भी सुरक्षित रखने होंगे। ड्रग इंस्पेक्टर राजकुमार शर्मा ने बताया इनमें से अगर कोई मेडिकल स्टोर दवाएं बेचता हुआ मिला तो थाने में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
इनके लाइसेंस किए गए निलंबित
एनएच मेडिकल स्टोर - ओल्ड कुतलूपुर (छीपीटोला), शिव मेडिकल स्टोर - साकेत कॉलोनी (शाहगंज), देव मेडिकल स्टोर - रैपुरा अहीर (अरसेना रोड), श्री बालाजी मेडिकल स्टोर - बाग फरजाना, मां कात्यायनी मेडिकोज - मोतीबाग (यमुनाब्रिज), रामा मेडिकल स्टोर - नेहरू नगर, वृंदावन मेडिकल स्टोर - न्यू आगरा, देव मेडिकल स्टोर - मधुवन नगर (राजपुर), फिरोज मेडिकल स्टोर - कश्मीरी बाजार (काला महल)।
महीने भर से चल रही है मामले की जांच
पंजाब पुलिस जय हनुमान फार्मा तक एक महीने की जांच के बाद पहुंची। दरअसल, नशे की दवा जब्त होने के बाद इसके निर्माता कंपनी नई दिल्ली में संपर्क किया।
यहां पर इन दवाओं के बैच नंबर के आधार पर जय हनुमान फार्मा कंपनी आगरा का नाम बताया। इस पर टीम यहां पर पहले भी जांच करने आई थी, लेकिन यह बंद मिली।
तीन-चार महीने से बंद है गोदाम
गोदाम मालिक ने टीम की पूछताछ में बताया कि किराएदार लाखन सिंह ने इसे तीन-चार महीने पहले ही खाली करके चला गया था। टीम के सदस्यों ने आसपास के लोगों से पता किया तो बताया कि गोदाम तीन-चार महीने से बंद है, पहले यहां दवाओं से लदी गाड़ियां आतीं थीं।
हो रही प्रमाणपत्रों की जांच
पंजाब पुलिस ने जय हनुमान फर्म की जानकारी मांगी थी, टीम के छापे में यह बंद मिली। गोदाम मालिक से मिले शपथपत्र समेत अन्य प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है। पुलिस को भी जानकारी दी है। रिपोर्ट पंजाब पुलिस को भी भेज दी है। - अखिलेश जैन, सहायक आयुक्त औषधि