प्रशासनिक भवन में करीब 40 मिनट चर्चा के बाद टीम ने मेल वार्ड, फीमेल वार्ड और फैमिली वार्ड देखा। भर्ती महिला मरीजों से फीडबैक लिया। इसके बाद टीम केंद्रीय कारागार पहुंची जहां जमानत के बाद भी एक बंदी रिहाई न होने पर नाराजगी जताई। इस दौरान टीम में एनएचआरसी के मुख्य सचिव देवेंद्र कुमार, संयुक्त सचिव एचसी चौधरी, आकांक्षा एवं शिल्पी जैन, राजीव जैन, एसएसपी प्रभाकर चौधरी आदि मौजूद रहे।
छह करोड़ रुपये हो गए लैप्स
मानसिक अस्पताल का सालाना बजट 19.75 करोड़ रुपये है। पिछले साल 12 करोड़ रुपये मिले। जिसमें छह करोड़ रुपये खर्च नहीं होने के कारण लैप्स हो गए। चेयरमैन ने पूछा, बजट का रोना रोते हो तो बजट लैप्स कैसे हो गया। कमिश्नर अमित गुप्ता ने बताया कि बजट 30 मार्च को मिला था, इसलिए खर्च नहीं हो सका। निकालने से पहले ही लैप्स हो गया।