पोइया घाट पर सबसे पहला बिजली का खंभा लगाया गया। इसके दस साल बाद मार्टिन बर्न कंपनी ने 0.5 मेगावाट क्षमता का बिजलीघर आगरा किला के सामने लगाया जो अब भी मौजूद है। बाद में इसकी क्षमता बढ़ाकर 29.75 मेगावाट कर दी गई थी। 18 दिसंबर 1973 को यूपी स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को मार्टिन बर्न कंपनी का यह बिजलीघर हस्तांतरित हो गया।
विशालकाय बॉयलर फटने की हुई थी दुर्घटना
कोयले के इस पावर प्लांट में एक बार विशालकाय बायलर फटने की दुर्घटना हो चुकी है। तब सेफ्टी को लेकर कई इंतजाम किए गए। 1983 में ताजमहल पर इसकी राख पहुंचने और प्रदूषण के कारण प्लांट बंद कर दिया गया। इसी के साथ यमुना बैंक पावर हाउस जो यमुना ब्रिज स्टेशन के पास बना था, वह भी प्रदूषण के कारण बंद करा दिया गया।
त्रिपोलिया चौक तोड़कर बना था फोर्ट स्टेशन
सिविल सोसायटी के राजीव सक्सेना ने बताया कि बिजलीघर त्रिपोलिया चौक को तोड़कर आगरा फोर्ट स्टेशन बनाया गया था। उसी से लूप लाइन बिजलीघर तक आती थी, जिससे कोयले की रैक अंदर पहुंचती थीं। इस बिजलीघर के सायरन का शोर कानों को झनझना देता था।