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आगरा: सूर सरोवर पक्षी विहार के मामले में एनजीटी ने किया तीन सदस्यीय कमेटी का गठन

Sat, 19 Sep 2020 12:04 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • आगरा के कीठम स्थित सूरसरोवर पक्षी विहार के ईको सेंसेटिव जोन में आनंद इंजीनियरिंग कॉलेज और हिंदुस्तान कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी तीन महीने में अपनी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपेगी। 
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एनजीटी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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आगरा के सूर सरोवर पक्षी विहार के मामले में शुक्रवार को एनजीटी में उमाशंकर पटवा की याचिका पर सुनवाई की गई, जिसमें एनजीटी चेयरमैन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की बेंच के सामने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने शपथपत्र दाखिल किया। वन मंत्रालय ने सूर सरोवर पक्षी विहार ईको सेंसेटिव जोन की सीमा तय करने पर फैले भ्रम के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पर ठीकरा फोड़ा है।

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सुप्रीम कोर्ट में इसी से जुड़े इसी से जुड़े एक मामले में याचिकाकर्ता डॉ. शरद गुप्ता ने बताया कि शुक्रवार को हुई सुनवाई में एनजीटी ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की वैज्ञानिक वीनू द्वारा शपथ पत्र दाखिल करने के बाद आदेश दिया कि तीन सदस्यीय जांच कमेटी पक्षी विहार के ईको सेंसिटिव जोन पर फैले भ्रम को दूर करेगी। राज्य सरकार के मुख्य वन संरक्षक, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के सचिव और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट के प्रतिनिधि इस कमेटी के सदस्य होंगे।

सुनवाई के दौरान बेंच के सामने बताया गया कि एक्सपर्ट कमेटी की 36वीं बैठक 18 जुलाई 2019 को हुई थी जिसमें सूर सरोवर पक्षी विहार के लिए ड्राफ्ट तैयार किया गया था। एक्सपर्ट कमेटी की बैठक 16 मार्च 2020 को हुई जिसमें ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी गई। एनजीटी बेंच के सामने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने जो शपथ पत्र दाखिल किया, उसमें उन्होंने साफ कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार इस बात में फेल रही है कि सूर सरोवर पक्षी विहार के असली दायरे को रेखांकित कर सके।

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800 से घटाकर 403.9 हेक्टेयर किया वन क्षेत्र

सूर सरोवर पक्षी विहार आगरा - फोटो : अमर उजाला
राज्य सरकार ने पहले जो ड्राफ्ट जारी किया, उसमें सूर सरोवर पक्षी विहार का संरक्षित क्षेत्र आठ वर्ग किलोमीटर का था, जिसका ईको सेंसेटिव जोन 18.17 वर्ग किमी रखा गया। जोन को एक किलोमीटर के दायरे में बांधा गया, लेकिन बाद में राज्य सरकार ने संशोधन करके इसे फिर से 403.9 हेक्टेयर कर दिया। 

इसके साथ ही ईको सेंसिटिव जोन की सीमा भी 10.20 वर्ग किमी कर दी गई। इन्हीं के चलते भ्रम फैला हुआ है। पर्यावरण मंत्रालय राज्य सरकार को लगातार पत्र लिखकर असली आंकड़े भेजने के लिए कह रहा है लेकिन राज्य सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 9 अक्तूबर को सुनवाई

सूर सरोवर पक्षी विहार के संरक्षित क्षेत्र को 800 हेक्टेयर से घटाकर 403 हेक्टेयर करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को होने वाली सुनवाई टल गई। कोर्ट ने अब इसके लिए 9 अक्तूबर का दिन तय किया है। याचिकाकर्ता डॉ. शरद गुप्ता ने बताया कि एनजीटी में हुई सुनवाई में भी इस बात का जिक्र किया गया कि मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने है।
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