पुलिसकर्मी अब त्रिनेत्र एप पर अपराधियों की फोटो और फिंगर प्रिंट के साथ आवाज भी अपलोड करेंगे। इससे एक क्लिक पर आरोपी का आपराधिक इतिहास सामने आ जाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) की मदद से आवाज को पहचानने में ज्यादा देर नहीं लगेगी।
डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि पुलिस विभाग में नए-नए एप्लीकेशन पर कार्य किया जा रहा है। अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद त्रिनेत्र एप्लीकेशन पर डेटा सुरक्षित रखा जाता है। इसमें आरोपी की व्यक्तिगत जानकारी से लेकर फिंगर प्रिंट और फोटो अपलोड की जाती थी। अब इस एप्लीकेशन में नया विकल्प भी जोड़ा गया है। पुलिसकर्मियों को आरोपियों की आवाज का भी सैंपल लेना होगा।
एक बार आवाज एप में आने के बाद दूसरे थानों की पुलिस को आपराधिक इतिहास खंगालने में आसानी होगी। एप में एआई की मदद से आवाज को पहचानकर रिकाॅर्ड निकल आएगा। इसमें ज्यादा समय भी नहीं लगेगा। इसके लिए कमिश्नरेट के सभी पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। एप के माध्यम से एक थाने से दूसरे थाने और अन्य जिलों की पुलिस को फायदा मिलेगा।