मतदान केंद्रों पर रविवार को नए मतदाता जोड़ने के लिए विशेष अभियान था। अमर उजाला की टीम ने मतदाता पुनरीक्षण अभियान की पड़ताल की तो पाया कि कई जगह बीएलओ दोपहर बाद चले गए तो कुछ जगह धूप सेंकते मिले। कुछ जगह काम भी हुआ यहां सबसे ज्यादा फार्म-6 भरे गए। कई मतदाताओं के पास जन्मतिथि का साक्ष्य नहीं होने पर उन्हें क्षेत्रीय पार्षद घर चक्कर लगाने पड़े।
प्राइमरी पाठशाला, प्रेम नगर
सुबह 10.45 बजे एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और व एक शिक्षक बीएलओ बैठे थे। वहां एक महिला आई। बीएलओ से बोली- पार्षद लिखके नाय दे रयो... कह रहियो ए मो पे जाके सिवा और कोई काम नाय का...। पेल्हे क्यों नई लिखवायलो...। फिर बीएलओ उस पार्षद को फोन करती है। तब जाकर महिला का आयु साक्ष्य बन सका।
सिंपकिंस स्कूल, मारुति एस्टेट
दोपहर 12 बजे स्कूल के परिसर में धूप में मेज-कुर्सियां रखी थीं। पांच बीएलओ बैठे थे। बोले-सुबह से एक भी मतदाता नहीं आया। एक मेज पर पर्यवेक्षक के कान पर मोबाइल था, हाथ में बीएनलओ की लिस्ट। फोन कर बीएलओ से पूछ रहा था बूथ पर पहुंचे या नहीं...।
सबका वोट है मेरा नहीं...
मेरे घर में सात लोगों का वोट है। मेरा नहीं बना। 20 साल उम्र है। मैं फॉर्म भरने आया हूं। पहली बार वोट डालूंगा। - अरुण कुमार, प्रेम नगर
दो बार भर चुका फॉर्म
मैने पहले ऑनलाइन फार्म भरा था। मेरा वोट नहीं बना। फार्म निरस्त कर दिया। मेरे पास उम्र का कोई प्रमाण नहीं है। - सरला देवी, हनुमान नगर