आगरा में कॉलेजों और स्कूलों द्वारा बायोमैट्रिक और केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं करने से करीब 5,000 एससी-एसटी छात्रों की छात्रवृत्ति की 60 फीसदी केंद्रीय राशि अटक गई है। प्रशासन ने संस्थानों को नोटिस जारी कर जल्द प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
कॉलेजों के प्रबंधन की लापरवाही और उदासीनता के कारण एससी और एसटी वर्ग के पांच हजार छात्रों की छात्रवृत्ति संकट में है। उन्हें राज्य से मिलने वाला छात्रवृत्ति का अंश तो मिल गया है, लेकिन केंद्र सरकार से आने वाली राशि खातों में नहीं पहुंच सकी है। इसके रुकने का कारण कॉलेज प्रबंधन के हेड और नामित नोडल के समाज कल्याण विभाग में आकर अपनी बायोमैट्रिक और केवाईसी प्रक्रिया का पूरा न करना है।
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जिले में एससी और एसटी के कक्षा 9 से 12 तक और उच्च शिक्षा में स्नातक और परास्नातक में पढ़ने वाले छात्रों ने सत्र 2025-26 में छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया था। इनमें करीब पांच महाविद्यालयों को छोड़कर शेष सभी ने बायोमैट्रिक की प्रक्रिया को पूरा कर दिया है। लेकिन सैकड़ों की संख्या में 10वीं तक के स्कूल और इंटर कॉलेजों ने नहीं कराया है।
इससे उन छात्रों को दो किस्तों में मिलने वाली छात्रवृत्ति रुक गई। उन्हें राज्य सरकार से छात्रवृत्ति के रूप में 40 फीसदी राशि और केंद्र सरकार से 60 फीसदी राशि मिलती है। इन छात्रों के खाते में राज्य से मिलने वाली 40 फीसदी राशि तो पहुंच गई है, लेकिन केंद्र सरकार ने बिना कॉलेज प्रबंधन समिति के बायोमैट्रिक की प्रक्रिया के कारण ऑथेंटिकेशन नहीं होने से 60 फीसदी राशि छात्रों के खाते में नहीं डाली है।
ये है स्थिति
कक्षा संस्था छात्र
9-10 184 2,396
11 -12 147 2,567
संस्थान बरत रहे हैं लापरवाही
समाज कल्याण अधिकारी नागेंद्र पाल सिंह का कहना है कि स्नातक, परास्नातक व अन्य 5 3 इन शैक्षणिक संस्थानों को कई बार सूचित किया गया है। इसके साथ ही जिला विद्यालय निरीक्षक को भी कॉलेज की लापरवाही से अवगत कराया है। लेकिन बायोमैट्रिक प्रक्रिया को कराने में तेजी नहीं दिखा रहे हैं, जिससे छात्रों की छात्रवृत्ति रुक सकती है।
नोटिस भेजे गए हैं
डीआईओएस रविंद्र पाल सिंह तोमर ने बताया कि सभी कॉलेज संचालक और नामित नोडल को नोटिस भेजे गए हैं। जिससे वह जल्द बायोमैट्रिक की प्रक्रिया को पूर्ण कराएं। जो भी इस कार्य में शिथिलता बरतेगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।