आगरा/फतेहपुर सीकरी। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी फतेहपुर सीकरी और उसके आस-पास के ग्रामीण अंचल में गहराता भूजल संकट अब एक मानवीय त्रासदी का रूप लेता जा रहा है। अत्यधिक खारापन, फ्लोराइड की अधिकता और गिरता वाटर लेवल न केवल खेती, बल्कि जनस्वास्थ्य और श्रमिकों के रोजगार के लिए भी काल बन गया है। इस गंभीर विषय पर उप्र ग्रामीण मजदूर संगठन ने आगरा स्थित यूथ हॉस्टल में एक चिंतन शिविर आयोजित कर प्रशासन को चेतावनी दी है।
संगठन के पदाधिकारियों ने चर्चा के दौरान बताया कि सिंचाई विभाग की लापरवाही के कारण तेरहमोरी बांध अपनी उपयोगिता खो रहा है। बांध के गेट क्षतिग्रस्त होने के कारण मानसून का पानी रुक नहीं पाता और बहकर निकल जाता है। यदि इस बांध की समय रहते मरम्मत कराई जाए और जल संचयन सुनिश्चित हो, तो समूचे क्षेत्र के भूजल स्तर को रिचार्ज किया जा सकता है। विशेषज्ञों ने सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि खारी नदी के प्राकृतिक बहाव में बाधा आने से हैंडपंप और कुएं सूख रहे हैं। पानी में फ्लोराइड की मात्रा बढ़ने से हड्डियां कमजोर हो रही हैं। वहीं, हवा में बढ़ता एक्यूआई फेफड़ों की बीमारियों को न्योता दे रहा है।
प्राथमिकता के आधार पर हो बांध की मरम्मत
श्रमिक नेता तुलाराम शर्मा ने कहा, दूषित पानी और जहरीली हवा के कारण स्थानीय श्रमिक बीमार पड़ रहे हैं। स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्हें काम नहीं मिल रहा है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने मांग की कि तेरहमोरी बांध की प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत हो। क्षेत्र में एक्यूफर रिचार्ज योजना लागू की जाए श्रमिकों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए जाएं।