उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के सदस्य रहे प्रोफेसर नीरज किशोर मिश्रा ने मंगलवार को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया। नीरज किशोर मिश्रा कासगंज के पटियाली के रहने वाले हैं। कासगंज में ब्राह्मणों के नेता के रूप में जाने जाते हैं। बसपा ने विधानसभा चुनाव 2022 में उन्हें प्रत्याशी बनाया था, लेकिन जीत दर्ज नहीं कर सके।
नीरज किशोर मिश्रा बताया कि ब्राह्मण समाज के नेता पूर्व कैबिनेट मंत्री नकुल दुबे को बहुजन समाज पार्टी से निकाले जाने के कारण वह व्यथित हैं। उनके अथक प्रयासों को बसपा द्वारा नजरअंदाज करते हुए नकुल दुबे को पार्टी से निकाल कर ब्राह्मण समाज को अपमानित किया है। ब्राह्मण समाज के हित को दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ब्राह्मण समाज के हित को सर्वोपरि मानते हुए उन्होंने समर्थकों सहित बहुजन समाज पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दिया है।
2007 से शुरू की राजनीतिक पारी
नीरज मिश्रा ने अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत वर्ष 2007 से की। बहुजन समाज पार्टी से टिकट लेकर एटा की सकीट विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े। 200 वोटों के अंतर से चुनाव हार गए। उसके बाद वर्ष 2007 के अगस्त माह में प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने उन्हें उच्च शिक्षा आयोग का सदस्य बनाया।
वर्ष 2017 के चुनाव में नीरज किशोर मिश्रा की पत्नी पटियाली नगर पंचायत से चेयरमैन चुनी गईं। बीते चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने पटियाली विधानसभा क्षेत्र से नीरज मिश्रा पर भरोसा जताया था, लेकिन वह तीसरे स्थान पर ही रहे। पटियाली से सपा प्रत्याशी नादिरा सुल्तान ने भाजपा के ममतेश शाक्य को हराया था।