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राष्ट्रीय युवा दिवस: नई सोच से फहराया परचम, लिखी सफलता की 'इबारत', पढ़िये मथुरा के युवाओं की कहानी

Tue, 12 Jan 2021 11:04 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
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राष्ट्रीय युवा दिवस: कीर्ति, शिप्रा और पवनी खंडेलवाल (क्रमश:) - फोटो : अमर उजाला
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युवा दिवस के मौके पर आज हम आपको कुछ ऐसे कामयाब लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने अपने युवा अवस्था में सफलता की कई इबारतें रची। 
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12 हजार महिलाओं की जिंदगी संवारी 
शिप्रा राठी खजानी वेलफेयर सोसाइटी नामक एक एनजीओ की संचालिका हैं। जो गत 13 वर्षों से मथुरा व आसपास के क्षेत्रों की महिलाओं और युवतियों को व्यवसायिक शिक्षा प्रदान करके आत्मनिर्भर करने के लिए सतत प्रयासरत हैं। उनकी मेहनत और लगन से अभी तक 12000 से ज्यादा महिलाएं और उनके पास से सिलाई, पार्लर और कंप्यूटर की ट्रेनिंग ले चुकी हैं। गत 3 वर्षों से जिला कारागार मथुरा से भी जुड़ी हैं और वहां के पुरुष व महिला कैदियों को भी व्यवसाय शिक्षा प्रदान करके उनकी जिंदगी को सजा संवार रही हैं।
 
पांच हजार महिलाओं को प्रभावित किया
सामाजिक उद्यमी, स्पीकर और कार्यकर्ता के रूप में पवनी खंडेलवाल ने शहर में अपनी पहचान बनाई है। आत्म निर्भर वूमंस एसोसिएशन की संस्थापक पावनी खंडेलवाल गतिशीलता और उद्यमिता के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रही हैं और केवल 3 वर्षों में उत्तर प्रदेश और राजस्थान में 5,000 से अधिक महिलाओं को प्रभावित किया है।
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राष्ट्रीय युवा दिवस: किसी ने नौकरी छोड़ फूलों की खेती को बनाया रोजगार, किसी ने खेल में बनाई पहचान

प्रतिष्ठित भारतीय स्कूल ऑफ बिजनेस और सिंगापुर के नेशनल यूनिवर्सिटी और सिंगापुर के टिंगहुआ विश्वविद्यालय में उद्यमिता का भी अध्ययन कर दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कई सामाजिक उद्यमिता कार्यक्रमों और सम्मेलनों जैसे वर्ल्ड इकोनॉमिक ऑर्डर इन यूएस, स्टार्ट-अप एशिया बर्लिन, अशोका चेंजमेकर्स आदि में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। वह भारतीय महिला सामाजिक उद्यमी नेटवर्क की संस्थापक सदस्य भी हैं। 
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देश ही नहीं विदेशों तक पहुंचाई पोशाकें
कीर्ति बंसल ने अपनी मेहनत के बल पर भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में मथुरा की पहचान कराई है। उन्होंने वर्ष 2016 से मथुरा की सुंदर आकर्षक पोशाकों को विदेशों तक पहुंचाने की शुरुआत की। उन्होंने फ्लिप कार्ट व एमेजन के माध्यम से इस रास्ते को अपनाया और अमेरिका से लेकर कनाडा तक मथुरा की कलाकृति सुंदर पोशाकों को पहुंचाया। आज उनके द्वारा भेजी जाने वाली पोशाकें कई देशों तक पहुंची हैं। कीर्ति बंसल सौ से अधिक महिलाओं को पोशाक निर्माण के साथ बिजनेस का प्रशिक्षण भी दे चुकीं हैं। 



मथुरा की गलियों से अंतरराष्ट्रीय शतरंज खिलाड़ी बने
नकुल चौधरी एक अंतरराष्ट्रीय शतरंज खिलाड़ी हैं। ग्रेजुएशन खत्म करके 2010 में शतरंज खेलना शुरू किया। 2012 में डिस्ट्रिक ओपन चैंपियन बने, 2014 में स्टेट जूनियर जीती इसके बाद 2017 में ऑल इंडिया बिलो 1600 पर कब्जा जमाया। अब तक मथुरा में सबसे बड़ी इनामी राशि शतरंज में जीतने का रिकॉर्ड भी नकुल के नाम है। मथुरा में पहला फिडे आर्बिटर होने के साथ प्रदेश में पांचवां स्थान प्राप्त है। अब तक मथुरा में शतरंज विकास के लिए खुद प्रबंधक के रूप के साथ साथ मुख्य निर्णायक की भूमिका निभा रहे हैं। 
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