अकोला फोटो – राष्ट्रीय संत हर योगी महाराज का फाइल फोटो।
अकोला। ग्राम पंचायत अकोला के थोक ऊधर के मूल निवासी राष्ट्रीय संत स्वामी हरियोगी महाराज ने बुधवार को अपने पैतृक गांव ऊधर में ब्रह्मलीन होकर शरीर त्याग दिया। उनके निधन की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
स्वामी हरियोगी महाराज ने देशभर में हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों से आध्यात्म, भागवत कथा, प्रवचनों और सत्संग के माध्यम से सनातन ज्ञान का प्रचार-प्रसार किया। उनके ओजस्वी वक्तव्य और सरल भाषा में दिए गए उपदेश सुनकर श्रद्धालु रोमांचित हो जाते थे। वे युवाओं को धर्म और संस्कारों से जोड़ने के लिए विशेष रूप से जाने जाते थे। उन्होंने आध्यात्मिक, गीत, धार्मिक और सामाजिक विषयों पर दर्जनों पुस्तकें लिखीं। ‘खुशबू कण, गीत संग्रह, गुनगुनाते रहो, मुस्कुराते रहो, जिंदगी चार दिन की है’ जैसी उनकी रचनाएं आज भी लोगों के बीच काफी प्रचलित हैं। उनकी किताबों में जीवन जीने की कला और सकारात्मकता का संदेश मिलता है। स्वामी जी ने अपने पैतृक गांव ऊधर, अकोला में बुधवार को अंतिम सांस ली। अकोला और आसपास के गांवों से सैकड़ों श्रद्धालु उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। पूरा क्षेत्र हरियोगी महाराज की जय, के नारों से गूंज उठा।