मथुरा में हुए चर्चित रामू एनकाउंटर में पांच साल बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने डीएम, एसएसपी, तत्कालीन आईजी, एसएन चिकित्सा अधीक्षक समेत 22 लोगों को नोटिस जारी किए हैं। बीते माह 22 से 26 फरवरी तक एनएचआरसी टीम जांच के लिए आगरा आई थी। टीम को जांच से संबंधित दस्तावेज, वीडियो रिकार्डिंग व गवाह व अन्य साक्ष्य नहीं मिले। 23 मार्च को आयोग ने साक्ष्यों सहित गवाहों को तलब किया है।
फतेहपुर सीकरी के चार हिस्सा निवासी 23 वर्षीय रामू लोधी पुत्र प्रेम सिंह की मौत 8 दिसंबर, 2016 को मथुरा के राधिका विहार में हुई थी। उनके सिर में गोली लगी थी। पुलिस ने बताया था कि उसने व्यापारी झम्मनदास के साथ लूट की कोशिश की थी। इसके बाद हुई मुठभेड़ में वह मारा गया। हालांकि बाद में पता चला कि उसके खिलाफ पहले से कोई केस दर्ज नहीं था और वह आईटीआई का छात्र था तो पुलिस के बोल बदल गए। तब पुलिस अधिकारियों की ओर से कहा गया कि पब्लिक और पुलिस में से गोली किसने चलाई, यह पता नहीं चला है।
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मामले में रामू के पिता प्रेम सिंह ने तब तत्कालीन आईजी सुजीत पांडेय से पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच की मांग की थी लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई। प्रेम सिंह ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत की। पुलिस पर मैनपुरी के हिस्ट्रीशीटर रामू चौहान के धोखे में उसके पुत्र रामू लोधी का फर्जी एनकाउंटर करने का आरोप लगाया।
मामले में घटना के पांच साल बाद 9 फरवरी, 2021 को एनएचआरसी ने आगरा के डीएम, एसएसपी, आईजी जोन, थाना प्रभारी फतेहपुर सीकरी समेत 22 लोगों से जवाब तलब करते हुए नोटिस जारी किए।
एनएचआरसी की डीआईजी मंजिल सैनी ने घटना की स्थलीय जांच के लिए उपाधीक्षक दुष्यंत त्यागी के नेतृत्व में 22 से 26 फरवरी तक निरीक्षण किया।
जांच अधिकारी दुष्यंत त्यागी ने बताया कि जांच के दौरान डीएम, एसएसपी स्तर से कई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। जांच के दौरान कई लोग उपस्थित भी नहीं हुए। मामले में रामू की मां नेमवती, पत्नी हरबीरी, भाई अजीत सिंह, चाचा महेन्द्र सिंह और पूर्व जिला पंचायत सदस्य राजपाल यादव ने पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाते हुए बयान दिए हैं।
इन सवालों के जवाबों की तलाश
मानवाधिकार आयोग ने आगरा डीएम से पूछा है कि मामले की मजिस्ट्रियल जांच क्यों नहीं कराई? आयोग को सूचना क्यों नहीं दी गई? पीड़ितों की एफआईआर पर जांच क्यों नहीं हुई? एसएसपी से पूछा है कि आरोपित सिपाही वीरेन्द्र के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? एसएन चिकित्सा अधीक्षक से पूछा है कि क्या 53 किमी दूर से लाए रामू को एसएन में भर्ती किया तो क्या वह जिंदा था? रामू के फिंगर प्रिंट, घायल अवस्था में क्या उपचार किया?