नानपुर ग्राम पंचायत में सीसी सड़क निर्माण को लेकर बड़े घोटाले के आरोप लगे हैं, जहां कागजों में सड़क बनी दिखाई गई लेकिन जमीन पर निर्माण नहीं हुआ। शिकायत में 50 करोड़ रुपये तक की वित्तीय अनियमितता और शौचालय निर्माण में भी गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
आगरा के बिचपुरी की ग्राम पंचायत नानपुर में सीसी सड़क निर्माण घोटाले के मामले ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है। सोमवार को किसान-मजदूर नेता चौधरी दिलीप सिंह ने उप कृषि निदेशक के कार्यालय में 43 पृष्ठों का दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत कर दिए, जिससे प्रथम दृष्टया वित्तीय अनियमितता और निर्माण में हेराफेरी के आरोप मजबूत होते नजर आ रहे हैं।
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चौधरी दिलीप सिंह के अनुसार, अरुण सिंह के मकान से गुड्डू के मकान तक प्रस्तावित सीसी सड़क का निर्माण मूल स्थान पर न कराकर खेत में विकसित एक निजी कॉलोनी में करा दिया गया। आरोप है कि इसके लिए अवर अभियंता और ठेकेदार ने कॉलोनाइजर से धन लेकर कार्य स्थल बदल दिया।
दस्तावेजों में सामने आया है कि अवर अभियंता द्वारा 7,42,692 रुपये का बिल (एमबी संख्या 179, पृष्ठ 82, दिनांक 16 नवंबर 2024) प्रस्तुत किया गया, जबकि मौके पर न तो स्वीकृत स्थल पर निर्माण हुआ और न ही वहां कोई आबादी मौजूद है। इसके अलावा, जेई द्वारा मौके पर माप करते हुए फोटो, शिलापट्ट की प्रतिलिपि भी साक्ष्य के रूप में दी गई है।
स्वीकृत गली बदहाल, ग्रामीण परेशान
चौधरी दिलीप सिंह ने कहा कि जिस गली के लिए सीसी सड़क स्वीकृत हुई थी, वहां आज भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है, जबकि कागजों में सड़क का निर्माण पूर्ण दिखाया जा चुका है। 50 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार की आशंका चौधरी दिलीप सिंह ने वर्ष 1997 और 2021 के शासना देशों का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया है कि जिला पंचायत के निर्माण कार्य केवल उसकी स्वामित्व वाली भूमि पर ही किए जा सकते हैं, जबकि यहां कथित रूप से नजूल या निजी भूमि पर निर्माण कराया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इसी तरह के अन्य निर्माण- दुकान, गेस्ट हाउस आदि- भी नियमों के विपरीत कराए गए, जिससे करीब 50 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार की आशंका जताई गई है।
शौचालय निर्माण में भी गड़बड़ी का आरोप
किसान-मजदूर नेता ने आरोप लगाया कि संबंधित अवर अभियंता द्वारा बनाए गए करीब 100 शौचालयों में निर्धारित सीसी प्लेटफॉर्म का निर्माण नहीं कराया गया, जिससे बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की आशंका है। उन्होंने मांग की है कि जांच समिति लिखित रूप से विभाग से एमबी, फाइलें और संबंधित पत्रावलियां तलब करें, जिससे तकनीकी जांच के जरिए पूरे मामले का खुलासा हो सके।
साथ ही जिला पंचायत के पिछले चार वर्षों के बजट खर्च का मदवार ब्योरा भी जांच में शामिल करने की मांग उठाई गई है। वर्जन जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी उमेश चंद्र ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद संबंधित सड़क का भुगतान रोक दिया गया है। निर्माण को श्रमदान के तहत दर्शाया गया है।