आगरा के बीएसए दफ्तर में रहस्यमय ढंग से आग लग जाने के मामले में पुलिस की जांच सोमवार को अचानक से ठंडी पड़ गई। न तो मौका मुआयने के लिए फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम आई। न ही पुलिस ने उन लिपिकों से पूछताछ की जो पहले दिन से ही शक के दायरे में है। अब तक सिर्फ चौकीदार से पूछताछ हुई। इसका नतीजा सिफर रहा है।
पुलिस ने लिपिकों की कॉल डिटेल निकलवाने के लिए कहा था लेकिन यह भी मिल नहीं पाई है। अग्निश्मन के अधिकारियों की जांच में मदद ली जा सकती है लेकिन अब तक ऐसा नहीं किया गया है। बीएसए ने जो केस दर्ज कराया है, वह आग लगाए जाने का। पुलिस को अब यह मालूम करना है कि आग किसने और क्यों लगाई?
8 अक्तूबर को लगी आग में 1500 फाइलें जल गई थीं। ये शिक्षकों के खिलाफ चल रही जांच, फर्जी डिग्री वाले शिक्षकों की बर्खास्तगी से संबंधित हैं। पुलिस को उन लिपिकों पर शक हुआ जिनका पटल खिड़की के पास है।
आग यहीं से लगी थी। यहीं पर फाइलें मेज पर रखी थीं जबकि इन्हें लोहे की अलमारी में रखा जाना चाहिए था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इनमें से एक लिपिक से आग लगने वाली रात ही पूछताछ हुई। इसकेबाद उसने अपना फोन स्विच ऑफ कर लिया है।