प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार बनने के बाद पिछले वर्ष निकाह पंजीकरण को अनिवार्य करने के बाद भी मुस्लिम समुदायों के लोग इसे कुबूल नहीं कर पा रहे हैं।
गत आठ माह में सिर्फ रजिस्ट्रार कार्यालय में मात्र 10 मुस्लिमों ने ही निकाह पंजीकरण कराया है, जबकि हिंदुओं के विवाह पंजीकरण की संख्या देखी जाए तो यह 2078 है।
वहीं, ईसाई समुदाय भी विवाह का पंजीकरण कराने में पीछे हैं। इस समुदाय के एक वर्ष में मात्र एक ही जोड़े ने पंजीकरण विवाह पंजीकरण कराया है।
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- फोटो : अमर उजाला
पिछले साल योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियमावली-2017 को लागू किया था। इसमें पूर्व की नियमावली के सापेक्ष कई बदलाव किए गए थे। सभी धर्मों के लोगों के लिए शादी पंजीकरण कराना अनिवार्य किया था।
हालांकि किसी धार्मिक रीति रिवाज में कोई बदलाव नहीं किया गया था। मुुस्लिमों के लिए चार निकाह तक पंजीकरण कराने की छूट दी गई। सितंबर से इसकी शुरूआत की गई।
नियम लागू होने से पहले हुई शादी का भी पंजीकरण कराने की, इसमें व्यवस्था की है। अब इस नियमावली को लागू हुए आठ माह से से ज्यादा हो चुका है, लेकिन लोगों ने सरकार के फरमान पर रुचि नहीं दिखाई है।
ऐसे करा सकते हैं पंजीकरण
निकाह पंजीकरण कराने में मुस्लिम सबसे पीछे हैं। निबंधन कार्यालय पंचम में तो एक भी निकाह पंजीकरण नहीं कराया गया है। शादी का पंजीकरण लोग विवाह से पूर्व या बाद में करा सकते हैं।
इसके लिए संबंधित तहसील में निबंधन कार्यालय में आवेदन करना होता है। इसके लिए सरकार ने मात्र 10 रुपये का शुल्क निर्धारित किया है।
हालांकि नये नियम के अनुसार अब शादी के एक साल बाद पंजीकरण कराने पर 50 रुपये प्रतिवर्ष विलंब शुल्क जमा करना पड़ता है।
2017-18 की ये है स्थिति
निबंधन कार्यालय कुल पंजीकरण हिंदू मुस्लिम ईसाई
प्रथम 483 481 2 0
द्वितीय 783 780 3 0
तृतीय 415 412 3 0
चतुर्थ 131 129 2 0
पंचम 274 273 0 1