बुर्के पर प्रतिबंध लगाने को लेकर कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं की बयानबाजी को आगरा की मुस्लिम युवतियों और महिलाओं ने सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि यह पहनावा थोपा नहीं गया है। यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है। अपनी सुविधा के मुताबिक इसे पहनती हैं। ज्यादातर लड़कियां शादी के बाद बुर्का पहनती हैं।
नई आबादी के पक्की सराय की रहने वाली अशरफ कहती हैं कि बुर्के में हम अपने आपको बुरी नजर और बुरी नीयत से महफूज करते हैं। बुर्का एक मुकम्मल ड्रेस है। इसमें किसी तरह का दिखावा और फैशन नहीं है। इसे पहनने को लेकर परिवार का भी कोई दबाव नहीं होता है। ज्यादातर बुर्का लड़कियां शादी के बाद पहनती हैं। यह उनकी मर्जी पर निर्भर होता है।
शहीद नगर की सोनी कुरैशी कहती हैं कि हिजाब या बुर्का पहनना हमारी संस्कृति का हिस्सा है। इसे पहनने पर रोक लगाने की बात कहना है, भेदभाव को बढ़ाने वाली बात है। क्या घूंघट पर बैन लगेगा। सलीकेदार पहनावा है बुर्का और ज्यादातर स्टूडेंट लाइफ में तो इसे नहीं पहनती हैं।