मैनपुरी। स्वर कोकिला भारतरत्न लता मंगेशकर के निधन से जिले के संगीतकार और साहित्यकार दुखी हैं। लता मंगेशकर को साहित्यकारों ने देश लिए बड़ी क्षति बताया। साहित्यकारों का मानना है कि फिल्म जगत को ऊंचाईयों तक पहुंचाने में लता मंगेशकर ने बड़ा योगदान दिया। राष्ट्र के लिए उनके द्वारा गाए गए गीत आज भी लोगों को प्रिय हैं।
कवयित्री ऊषा त्रिपाठी ने कहा कि देश ने अपनी उस बेटी को खो दिया जिसने विश्व पटल पर देश का नाम रोशन किया। उन्होंने लता मंगेशकर को अपनी ये चंद लाइनें भेंट कीं। लता इस धरती की शान थीं तुम, विश्व की पहचान थीं तुम, गंगा की सौगंध सुनो, बेटियों की आन-बान शान थीं तुम।
राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त कवि डॉ. पदम सिंह पदम ने कहा कि स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर का निधन देश के लिए क्षति है। ऐसे श्रेष्ठ प्रतिभा के धनी संसार में कभी-कभी पैदा होते हैं। लता ने अपने सुमधुर कंठ से सारे संसार में जो पहचान बनाई वह अद्वितीय है। समूचा भारतवर्ष उनके निधन से आहत है।
कवि धर्मेंद्र सिंह धर्म कहना है कि लता मंगेशकर स्वर की देवी थीं। उन्होंने भारतीय संगीत को जिस ऊंचाई तक पहुंचाया उसके लिए देश सदैव उनका ऋणी रहेगा। उन्होंने लता मंगेशकर को चंद लाइनें भेंट कीं। स्वर की देवी थीं लता, मानवता की मूर्ति, कभी नहीं हो पाएगी अब उनकी क्षतिपूर्ति ।
कुंवर आरसी महिला महाविद्यालय की संगीत विभागाध्यक्ष एसो. प्रोफेसर डॉ. शेफाली यादव ने कहा कि भारतरत्न लता के निधन से सारा विश्व स्तब्ध है। संगीत के क्षेत्र में उनका अतुलनीय योगदान सर्वविदित है। उन्होंने इन लाइनों से श्रद्धांजलि दी। यूं तो ये दुनिया है इसमें, जो आए हैं वे जाएंगे, युग-युग तक पर गीत लता के, दुनियां में गाए जाएंगे।