आगरा के सौ फुटा रोड पर शनिवार रात को बीएसएनएल के जूनियर टेलीफोन ऑफिसर (जेटीओ) वीरेंद्र कुमार की हत्या कर दी गई। उनका शव घर से 400 मीटर दूर पड़ा मिला। वीरेंद्र किसी का फोन आने पर घर से निकले थे। उनका मोबाइल और रुपये नहीं मिले हैं। हत्या का कारण पता नहीं चल सका है। पुलिस जांच कर रही है।
दौरैठा नंबर एक में पंचशील कॉलोनी निवासी वीरेंद्र कुमार (45) पुत्र नाथूराम बिजलीघर स्थित बीएसएनएल के कार्यालय में तैनात थे। पिता नाथूराम ने बताया कि बेटे वीरेंद्र के पास शनिवार की रात तकरीबन एक बजे फोन आया था। इसके बाद वीरेंद्र ने पत्नी भावना को जगाकर 10 हजार रुपये मांगे।
उन्होंने कहा कि परिचित को देने हैं। भावना ने सात हजार रुपये वीरेंद्र को दिए। इसके बाद वीरेंद्र पैदल ही घर से निकल गए। आधा घंटे तक वापस नहीं आने पर भावना ने फोन मिलाया, लेकिन कुछ देर घंटी जाने के बाद मोबाइल स्विच ऑफ हो गया।
घर से 400 मीटर दूर मिला शव
इस पर भावना ने ससुर नाथूराम को बताया। सेना में सीनियर ऑडिटर के पद से सेवानिवृत्त नाथूराम दौरैठा नंबर एक में ही अशोक विहार में बड़े बेटे पूर्व फौजी सुशील कुमार और छोटे बेटे नरेंद्र के साथ रहते हैं।
परिजनों ने वीरेंद्र कुमार की तलाश शुरू की। घर से 400 मीटर दूर सौ फुटा रोड पर वीरेंद्र सड़क पर पड़े मिले। उनकी आंखों, चेहरे, छाती और गर्दन पर चोट का निशान था। बड़े भाई सुशील और भतीजा प्रशांत उनको साकेत कॉलोनी स्थित अस्पताल लेकर आए।
यहां भर्ती नहीं किया गया तो दिल्ली गेट स्थित अस्पताल ले गए, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इस पर एसएन मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी ले आए। यहां सूचना पर पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
किसी भी रंजिश से इंकार
सीओ नम्रता श्रीवास्तव के मुताबिक, वीरेंद्र की पत्नी ने बताया कि वीरेंद्र किसी परिचित का फोन आने के बाद घर से निकले थे। उनके मोबाइल और रुपये नहीं मिले हैं। परिजनों ने किसी तरह की रंजिश की बात नहीं कही है। जांच की जा रही है। परिजनों की तहरीर पर अज्ञात में हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण चोट लगने से होना आया है।
दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
वीरेंद्र कुमार के एक बेटा आयुष और बेटी सुभि है। आयुष कक्षा सात और सुभि कक्षा छह में पढ़ती है। वीरेंद्र की हत्या से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। पत्नी भावना के आंसू नहीं रुक रहे हैं। उन्हें रिश्तेदार किसी तरह संभाल रहे हैं। वह एक ही बात कह रही हैं, मैंने उनको रात में क्यों जाने दिया।