नगर निगम ने दो करोड़ रुपये से यमुना नदी में गिर रहे शहर के नालों पर बायो और फाइटो रेमेडिएशन कराया, लेकिन यह दो करोड़ रुपये बर्बाद हो गए। ताजमहल पूर्वी गेट और आगरा किला के गेट से निकल रहे नालों की दुर्गंध के कारण पर्यटक परेशान हैं। फरवरी में जी-20 के मेहमानों को भी दुर्गंध का सामना करना पड़ सकता है। मंटोला नाला आगरा किला के सामने कतरनों और गंदगी से भरा पड़ा है, वहीं ताज पूर्वी गेट नाले में ताजगंज का सीवर पहुंच रहा है।
ताजगंज के पार्षद शोभाराम राठौर के मुताबिक नगर निगम ने नालों पर जो बायो और फाइटो रेमेडिएशन कराया, वह कारगर नहीं रहा। न जाने कहां किस नाले में काम कराए गए। यही सवाल पार्षद शिरोमणि सिंह ने पूछा है कि जी-20 के मेहमानों से पहले फिर से नालों में केमिकल डालने के लिए कहा जा रहा है। निगम ने दो करोड़ रुपये दुर्गंध दूर करने के लिए खर्च किए, वो कहां गए। उसका असर क्यों नहीं हुआ। अगर केमिकल ही डालना था तो दो करोड़ रुपये खर्च क्यों किए गए।
अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए मंगाया था केमिकल
दो साल पहले जनवरी 2020 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ताजमहल यात्रा के दौरान ताज पूर्वी गेट नाले की दुर्गंध रोकने के लिए बंगलूरू की फैक्टरी से विशेष केमिकल हवाई जहाज से मंगवाया गया था। पूर्वी गेट पर सीवर के नाले में पहुंचने के कारण दुर्गंध दूर करने के लिए यह केमिकल 5 दिन पहले से डाला गया और तली झाड़ सफाई रातों रात कराई गई। लिली के फूलों की लड़ियां ताज नेचर वॉक से पूर्वी गेट तक सड़क के दोनों किनारों पर लगाई गईं। यमुना किनारे इत्र में डूबे हुए हरे रंग के कपड़ों और रूई को घास में रखवाया गया था ताकि यमुना किनारा जाने पर अमेरिकी राष्ट्रपति को दुर्गंध न आए। कन्नौज से कई लीटर इत्र मंगवाकर ताज के पीछे पार्क में डलवाया गया था।