इस ताजिये पर जियारत करने पूरे शहर के लोग आते हैं। इसके अलावा मुस्लिम बस्तियों में भी लोग ताजिए रखते हैं। दूसरी ओर, शिया समुदाय के इमामबाड़ों में मोहर्रम की पहली तारीख से मजलिसें शुरू हो जाएंगी। इनमें मुस्लिम विद्वान हजरत इमाम हुसैन की शहादत का जिक्र करेंगे। घरों में जिक्र-ए-हुसैन शुरू हो जाएगा।
अंजुमन-ए-पंजेतनी के संचालक प्यारे मियां ने बताया कि मोहर्रम की पहली तारीख से लेकर आठ रवि उल अव्वल तक शिया समुदाय की औरतें शोक मनाती हैं। इस दौरान काले लिबास पहने जाते हैं।
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शिया समुदाय के इमामबाड़े
1-शाहगंज स्थित अजाखाना
2-इमामबाड़ा मीर नियाज अली
3-पुराना इमामबाड़ा गांधी चौक
4-इमामबाड़ा जियाबलु हसन
5-इमामबाड़ा हुसैनिया घास की मंडी
6-इमामबाड़ा हाजी हसन फाटक लोहामंडी
7-इकान हैदर घास की मंडी