गंगातीर्थ सोरों सदियों से श्रद्धा का केंद्र रहा है। सोरों और गंगा के प्रति हर समुदाय के लोगों की अगाध श्रद्धा रही है। मुगलशासक अकबर जब फतेहपुर सीकरी में शासन करते थे तब सन 1582-83 में लगातार सोरों से उनके लिए गंगाजल जाता था। बताते हैं जब वह दिल्ली से शासन करते थे तब हरिद्वार से गंगाजल उनके लिए जाता था।
गंगा के पवित्र जल का अकबर पर बेहद प्रभाव था। गंगा जल की मान्यता थी कि इसका सेवन करने से चर्म रोग दूर होते हैं और शारीरिक विकार भी दूर होते हैं। इसी प्रभाव के चलते बड़े-बड़े कलशों में प्रतिदिन गंगाजल जाता था।
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इसके लिए सोरों में एक अलग से चौकी स्थापित की गई थी। आइने अकबरी में यह वर्णन मिलता है। सोरों के बारे में अकबर के प्रमुख दरबारी, नवरत्न, अबुल फजल ने आइने अकबरी में भगवान श्रीवाराह के द्वारा दैत्यराज हिरण्याक्ष के वध को प्रसंग भी वर्णित किया है।