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Yamuna Submergence: दो बार लगाई मुड्डियां... फिर भी तय नहीं हो सका यमुना डूब क्षेत्र, मैपिंग तक नहीं हो सकी

Sun, 14 Jul 2024 09:13 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

यमुना डूब क्षेत्र निर्धारण के लिए एनजीटी ने जलशक्ति मंत्रालय को पांच और केंद्रीय जल आयोग को दो बार नोटिस भेजा था। इसके बाद ही डूब क्षेत्र का निर्धारण नहीं हो सका है। 
 
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यमुना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने यमुना डूब क्षेत्र निर्धारण के मामले में लापरवाही बरतने पर जलशक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इससे पहले लोअर खंड सिंचाई विभाग ने दो बार यमुना किनारे मुड्डियां लगाई थीं, लेकिन दायरा तय नहीं होने के कारण मुड्डियां उखड़ गईं। प्रभावित क्षेत्र की मैपिंग तक नहीं हो सकी है।
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यमुना में दो बार बाढ़ आई। दोनों बार तटवर्ती इलाके प्रभावित हुए। 1978 में आई बाढ़ में यमुना का जलस्तर वाटरवर्क्स पर 154 मीटर रहा था। दयालबाग से लेकर बेलनगंज तक बाढ़ में डूब गया था। फिर 2010 में यमुना ने रौद्र रूप दिखाया। 2010 में आई बाढ़ में जलस्तर 152.10 मीटर रहा। ऐसे में सिंचाई विभाग ने 1978 और 2010 में आई बाढ़ के आधार पर डूब क्षेत्र का चिह्नांकन किया था। लेकिन 1978 या 2010 किस बाढ़ के आधार पर डूब क्षेत्र माना जाए यह तय नहीं हो सका। इसका फायदा उठाकर यमुना किनारे पर अवैध निर्माण शुरू हो गए।

 
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ताज संरक्षित वन क्षेत्र में जब अवैध ढंग से खोदाई की गई तब यह मामला दोबारा एनजीटी पहुंचा। पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने याचिका दायर करते हुए डूब क्षेत्र निर्धारण की मांग उठाई। इसे लेकर एनजीटी ने जलशक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग को निर्देश दिए। 20 सितंबर 2022 से 23 नवंबर 2023 तक जलशक्ति मंत्रालय को पांच बार और 7 जून 2024 से अब तक केंद्रीय जल आयोग को दो बार जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस भेजे। जवाब दाखिल नहीं हुआ। इसे डूब क्षेत्र निर्धारण के मामले में एनजीटी ने लापरवाही मानते हुए दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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