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UP: लापता बेटी को तलाश करने की ऐसी जिद, पुलिस ने नहीं तो...हाईकोर्ट जा पहुंची मां; वहां से मिली राहत की खबर

Mon, 14 Apr 2025 09:46 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

लापता बेटी की तलाश पुलिस नहीं कर सकी, तो मजबूर मां ने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया है कि छात्रा को तलाश कर कोर्ट में पेश करे। 
 
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स्कूल की छात्रा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
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आगरा में दसवीं की छात्रा को पड़ोसी युवक दो माह पूर्व फुसलाकर ले गया। मां ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई लेकिन पुलिस खोजने में नाकाम रही। पीड़िता की मां ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। जिसका संज्ञान लेकर हाईकोर्ट ने किशोरी को न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए पुलिस को आदेश जारी किए हैं।
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एत्माद्दौला क्षेत्र की नाबालिग छात्रा को पड़ोसी युवक ने प्रेम संबंध बनाकर आपत्तिजनक फोटो खींचे। 27 दिसंबर को युवक ने किशोरी के मोबाइल पर मैसेज भेजकर कहा कि यह फोटो तुम्हारे भाई के पास भेज रहा हूं। इससे किशोरी अवसाद में आ गई। 9 फरवरी को युवक किशोरी को फुसलाकर ले गया। एत्माद्दौला पुलिस ने केस दर्ज किया।

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किशोरी के परिजन ने आरोपी के मोबाइल नंबर, यूपीआई नंबर, बैंक के खाते, परिजन के नाम और मोबाइल नंबर दिए, जिनसे उसकी लगातार बात हो रही थी। यूपीआई से लेन-देन करता था। इसके बावजूद पुलिस किशोरी को मुक्त नहीं करा सकी। किशोरी के परिजन ने बाल अधिकार कार्यकर्ता नरेश पारस से मदद मांगी। पारस ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका दायर कराई।

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युवक ने तैयार किए कूटरचित दस्तावेज
किशोरी को ले जाने के बाद आरोपी ने किशोरी को बालिग दर्शाकर उम्र संबंधी फर्जी दस्तावेज तैयार किए। खुद को बालिग दर्शाकर एफआईआर को खारिज कराने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में कहा कि दोनों याचिकाकर्ता बालिग हैं तथा उन्होंने अपनी मर्जी से विवाह किया है।

 
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मां की ओर से अधिवक्ता ने किशोरी का जन्म प्रमाणपत्र, हाईस्कूल का प्रवेशपत्र, आधार कार्ड आदि न्यायालय में प्रस्तुत किए। जिस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए पुलिस को निर्देश जारी किए कि जांच अधिकारी किशोरी का धारा 180 के अंतर्गत बयान दर्ज करें। दो सप्ताह के अंदर धारा 183 का बयान दर्ज करने के लिए संबंधित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करें। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में कहा गया कि किशोरी को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है। एसएचओ किशोरी को अगली तिथि 5 मई को हाईकोर्ट में पेश करें।
 
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