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आगरा में बारिश के दौरान हादसा: कमरे की छत गिरने से दब गईं मां-बेटियां, देवदूत बनकर आई रेस्क्यू टीम; बचाई जान

Thu, 16 Jan 2025 10:00 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा में बारिश के दौरान आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर चार में एक घर की छत गिर गई। छत के मलबे में मां और दो बेटियां दब गईं। सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच गई। मां और बेटियों को सुरक्षित निकालते हुए उनकी जान बचाई। 
 
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रेस्क्यू टीम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आगरा के आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर-4 में बारिश के कारण बृहस्पतिवार तड़के जूता श्रमिक के घर की छत ढह गई। मलबे में मां और दो बेटियां दब गईं। दमकलकर्मियों ने दो घंटे की मशक्कत के बाद कटर से लेंटर काटकर तीनों को बचाया।
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हादसा तड़के करीब 3:45 बजे का है। सेक्टर-4 में रहने वाले फतेह सिंह जूता फैक्टरी में काम करते हैं। परिवार में पत्नी अनीता, बेटियां मुस्कान (18), गौरी (16), आराध्या (4) और बेटा योगेश (19) हैं। बगल में दूसरे कमरे में भाई का परिवार रहता है। परिजन ने बताया कि अनीता, बेटियों मुस्कान व आराध्या व पति एक कमरे में सो रहे थे। योगेश बगल के कमरे में था। वहीं गौरी अपने चाचा खेमचंद के घर में सो रही थी।

बुधवार रात को लगातार बूंदाबांदी के कारण छत टपकने पर अनीता ने पति को बाल्टी रखने के लिए बाहर भेजा। पति के कमरे से बाहर निकलते ही छत भरभराकर ढह गई। अनीता अपनी बेटियों के साथ मलबे में दब गईं। पति के शोर मचाने पर परिजन व कॉलोनी के लोग जुट गए। मलबे के नीचे दबीं अनीता, मुस्कान और आराध्या की चीखें सुनाई दे रही थीं।
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देवर खेमचंद ने हथौड़े की मदद से लेंटर को तोड़ना शुरू किया। सूचना पर कुछ ही देर में सीएफओ देवेंद्र सिंह भी टीम के साथ पहुंचे। दमकलकर्मियों ने कटर से लेंटर को काटा। रस्सी की मदद से टूटे लेंटर को खींचा गया। पहले आराध्या फिर मुस्कान को निकाला गया। 

अनीता देवी के पैर मलबे में दबे होने पर उन्हें बाहर निकालने के लिए सुबह 5 बजे तक बचाव कार्य चला। इस दौरान परिवारीजन अनीता का साहस बढ़ाते रहे। दमकलकर्मियों ने ड्रिल मशीन से लेंटर काटकर अनीता को सकुशल बाहर निकाला। 

तीनों को एसएन मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद तीनों को छुट्टी दे दी गई। अपर पुलिस आयुक्त संजीव त्यागी घटनास्थल पर पहुंचे। परिजन ने उनसे परिवार की आर्थिक मदद की गुहार लगाई। परिजन का कहना था कि छत गिरने से पूरा परिवार सड़क पर आ गया है। अपर पुलिस आयुक्त ने उन्हें मदद का आश्वासन दिया।

दो घंटे तक प्रार्थना करती रहीं अनीता
लेंटर के नीचे दबी अनीता मौत के मुंह में दो घंटे तक फंसी रहीं। उनके दोनों पैर फंसे थे। लेकिन उन्हें अपने से ज्यादा बेटियों की चिंता थी। वह आराध्या को सीने से लगाए रहीं, ताकि वह घबराए नहीं। वह बेटियों को पहले निकालने की गुहार लगाती रहीं। बेटियों के बाहर सकुशल निकलने पर उनकी हिम्मत बढ़ गई। लेकिन वह हिलडुल नहीं पा रही थीं। अनीता ने बताया कि कई बार उन्हें लगा कि अब सांस नहीं आएगी। लेकिन दमकलकर्मियों ने उन्हें निकाल लिया।

मदद के लिए आए काॅलोनी के लोग
पड़ोस में रहने वाले परिवार ने बताया कि लेंटर गिरने पर तेज आवाज हुई। इससे परिवार के लोग घबरा गए। बाहर आए तो फतेह सिंह के घर से चीखने की आवाज आ रही थी। इस पर मदद के लिए दाैड़ पड़े। ऐसा लग रहा था कि कोई बच नहीं पाएगा। मगर, भगवान का शुक्र है कि सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
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