अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत के बाद एकत्रित परिजन
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परिजन नवजात का अंतिम संस्कार करने ले गए। इधर, इसकी जानकारी जैसे ही प्रसूता को मिली, वह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसकी हालत बिगड़ने लगी। जहां स्टाफ नर्स वर्षा ने एंबुलेंस के लिए कॉल किया, लेकिन एक घंटे तक एंबुलेंस के न पहुंचने पर परिजन प्रसूता को निजी वाहन से नर्सिंग होम में लेकर चले गए। यहां डॉक्टरों ने उसे भी मृत घोषित कर दिया।
परिजन प्रसूता के शव को लेकर महिला अस्पताल लौट आए। यहां से शव पोस्टमार्टम गृह में रखवा दिया गया। गुरुवार को शव का पोस्टमार्टम कराकर शव को परिजनों को सौंप दिया गया। पोस्टमार्टम पर तैनात डॉक्टर ने बताया कि प्रसूता की मौत सदमा लगने से हुई है।
विवाहिता की मौत से मायके वालों में आक्रोश था, हंगामा होने की आशंका पर काफी संख्या में पुलिस बल अस्पताल में तैनात कर दिया। वहीं विवाहिता के पिता विजय बहादुर की ओर से गुरुवार को बेटी के पति बृजेश, ससुर चंद्रपाल, सास शांती देवी और ननद पुष्पा देवी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
आरोप है कि शादी के बाद से पांच लाख रुपये और एक बाइक की मांग की जा रही थी, मांग पूरी नहीं होने पर प्रसव पूर्व बेटी का उचित इलाज नहीं कराया, तबियत बिगड़ने पर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, यहां जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। थाना पिलुआ के एसएसआई देवेंद्र सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि गर्भवती महिला के पास पुरानी जांच का कोई कागज नहीं था। महिला को सुरक्षित प्रसव कराने के लिए उसे अस्पताल में भर्ती किया गया। स्टाफ द्वारा महिला को प्रसव कराया गया। यहां बच्चे में सांस नहीं थी, वहीं प्रसूता की हालत बिगड़ी तो उसे रेफर करने के लिए एंबुलेंस को कॉल की गई, लेकिन एंबुलेंस समय से अस्पताल नहीं पहुंची।
एंबुलेंस प्रभारी आलोक कुमार ने कहा कि महिला अस्पताल से एंबुलेंस के लिए रात 12.22 मिनट पर कॉल आई थीं यहां से एंबुलेंस को तत्काल भेजा गया है। एंबुलेंस समय से न पहुंचने की बात गलत है।