ताजनगरी में शादियों की धूम मची हुई है। 22 फरवरी तक 11 मुहूर्त हैं, जिनमें एक हजार से ज्यादा शादियां होनी हैं। लेकिन शादी वाले घरों में सबसे बड़ी दिक्कत गाड़ियों की हैं। बैंडबाजा, बराती सब तैयार हैं, मगर दूल्हे राजा दुल्हन के द्वार तक कैसे पहुंचेंगे। बसों का अधिग्रहण होने के कारण कई ट्रेवल एजेंसी संचालकों ने बुकिंग निरस्त कर दी हैं। दुल्हन की विदाई के लिए छोटी गाड़ियां भी नहीं मिल पा रही हैं।
फरवरी में सात, नौ, दस, 11, 12, 18, 19, 20 और 22 को बड़े सहालग हैं। चुनाव के लिए बाहरी जिलों से फोर्स को लाने व ले जाने के लिए एक फरवरी से ही वाहनों के अधिग्रहण का सिलसिला चल रहा है। 1200 बसों के साथ ही ढाई हजार छोटी गाड़ियों को चुनावी ड्यूटी में लगाया जाना है। छोटी गाड़ियों में कार, वैन, ईको, मेटाडोर, मिनी बस शामिल हैं।
600 से ज्यादा बसों का अधिग्रहण किया जा चुका है। 250 रोडवेज बसों को भी लगाया गया है। इनमें प्राइवेट और विद्यालयों की बसें भी शामिल हैं। ऐसे में ट्रेवल एजेंसी वाले टैक्सी परमिट वाली बसों को सड़क पर भेजने में कतरा रहे हैं, क्योंकि उन्हें अधिग्रहण का डर है। प्राइवेट और डग्गामार बसों के संचालक भी गाड़ियां नहीं निकाल रहे हैं। ऐसे में बरात ले जाने वाले परेशान हैं। रोडवेज बसों की किल्लत भी चल रही है।
निरस्त करनी पड़ी बुकिंग
ट्रेवल एजेंसी संचालक नरेश कुमार यादव ने बताया कि चुनावी अधिग्रहण के कारण बुकिंग निरस्त करनी पड़ी हैं। परिवहन की टीमें रास्ते में से ही गाड़ियां ले जा चुकी हैं। इसलिए एक बस की बुकिंग निरस्त कर दी। अब बुकिंग 10 के बाद और लोकल ही करेंगे।
सहालग में कमाई नहीं घाटा
ट्रेवल एजेंसी संचालक रामपाल सिंह ने बताया कि तीन गाड़ियों का अधिग्रहण हो गया, किस्त भी नहीं जमा हो सकी हैं। ऐसे में इस सहालग के सीजन में सबसे ज्यादा घाटा ट्रेवल एजेंसी संचालकों को उठाना पड़ रहा है। यह सीजन भी पिट गया।
बरात के लिए बस नहीं मिल रही
बोदला के धर्मवीर ने बताया कि भाई की शादी थी। लोकल में बरात जानी थी, बुकिंग कराने पहुंचे, लेकिन बस नहीं मिल पा रही है। दोस्तों के पास भी दो तीन गाड़ियां ही हैं। ऐसे में बरात ले जाने के लिए दिक्कत खड़ी हो गई है।
बहन की शादी के लिए नहीं मिली कार
शाहगंज के नसीर ने कहा कि 10 फरवरी को बहन की शादी है। मैरिज होम में निकाह की रस्में होंगी। घर से मैरिज होम तक दुल्हन को कैसे ले जाएंगे। ऐसे में कार वाले किसी संबंधी से मनुहार करनी पड़ेगी।
एक माह से चल रही है कवायद
एआरटीओ (प्रशासन) अनिल कुमार सिंह ने कहा कि चुनाव के दौरान किसी तरह की दिक्कत नहीं हो। इसके लिए अधिग्रहण की प्रक्रिया एक माह से चल रही थी। अधिग्रहण आदेश जारी करके बैठक भी बुलाई थी। निजी बसों का अधिग्रहण शत प्रतिशत किया गया है। अन्य वाहन भी लिए जा रहे हैं। स्कूलों को भी नोटिस जारी किए हैं।