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...तो आगरा में 47,000 में से 42,000 शस्त्र लाइसेंस हो जाएंगे निरस्त, यह है वजह

Sat, 29 Jun 2019 01:10 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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शस्त्र लाइसेंसधारी अगर कारतूस का हिसाब-किताब नहीं रख रहे हैं और सत्यापन के समय खरीदा गया कारतूस दिखाने में नाकाम रहते हैं तो ऐसे असलहाधारियों का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। डीआईजी कानून व्यवस्था विजय भूषण ने शुक्रवार को लखनऊ में मीडिया को यह जानकारी दी। 
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अगर इस पर अमल हुआ तो आगरा में 47000 में से 42000 शस्त्र लाइसेंस निरस्त हो सकते हैं। दरअसल, पुलिस के सैंपल सर्वे में यह बात सामने आई थी कि 95 फीसदी लाइसेंसधारकों के पास कारतूसों का हिसाब नहीं है।

लोकसभा चुनाव के दौरान आगरा के तत्कालीन एसएसपी अमित पाठक ने सभी थानों क्षेत्रों में यह पड़ताल कराई थी। रिपोर्ट में पाया गया है कि 910 में से सिर्फ 45 लोगों के पास कारतूसों का हिसाब था। पुलिस ने इसकी रिपोर्ट डीएम को दी। 
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35 लाख कारतूस गायब !

अमित पाठक ने रिपोर्ट शासन को भेजी। इसमें बताया गया है कि अगर यह पड़ताल सभी 47,000 लाइसेंसधारकों की कराई जाए तो आगरा में ही 35 लाख कारतूस गायब मिल सकते हैं। प्रदेश में संख्या करोड़ों में होगी।

विजय भूषण ने बताया कि ऐसे लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जिन लोगों ने मानकों का पालन नहीं किया है उनका लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आईपीएस अमित पाठक की रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। 

प्रदेश स्तर पर उन लाइसेंसधारकों की संख्या 10 लाख के पार पहुंच जाएगी जिनके पास कारतूसों का हिसाब नहीं है। प्रदेश में कुल लाइसेंसधारियों की संख्या 12.78 लाख है। यानी एक झटके में ही लाखों असलहे अवैध हो जाएंगे। जिससे पार पाना पुलिस के लिए भी एक चुनौती होगी।
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शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट

डीजीपी मुख्यालय असलहों के लाइसेंस और कारतूस केसत्यापन के लिए फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है और जल्दबाजी में कोई निर्णय लेने के मूड में नहीं है। सूत्रों का यह भी कहना है कि डीजीपी मुख्यालय पर रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट शासन को भी भेजी जाएगी। क्योंकि लाइसेंस प्राधिकारी जिलाधिकारी होता है इसलिए निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा।

अपराधियों को बेचे जा रहे हैं कारतूस

अमर उजाला की पड़ताल में यह बात सामने आई कि लाइसेंसधारकों में से ही कई लोग अपराधियों को कारतूस बेच रहे हैं। इसका पता विधि विज्ञान प्रयोगशाला में अवैध असलाह केसाथ आए वैध कारतूसों से चलता है। यहां हर साल ऐसे 5000 कारतूस परीक्षण के लिए आ रहे हैं जिनका अपराध में इस्तेमाल किया गया हो। छह जून के अंक में माई सिटी में इसकी खबर प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी।
 
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