डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के अभी चार कर्मचारी जेल गए हैं। बीएड फर्जी मार्कशीट प्रकरण में ये गिरफ्तारी तो महज कार्रवाई की शुरुआत मानी जा रही है। जल्द ही विवि के 30 और कर्मचारियों के हाथों में हथकड़ी लग सकती है।
इन्हें 2004-05 के बीएड फर्जी मार्कशीट प्रकरण में आरोपी बनाने की तैयारी एसआईटी ने कर ली है। सिर्फ हाईकोर्ट से आदेश मिलने का इंतजार है। इसके बाद तेजी के साथ कार्रवाई की जानी है।
बता दें कि आगरा विवि में बीएड की चार हजार मार्कशीट फर्जी पाई गईं। फर्जी मार्कशीट के अलग-अलग चल रहे आठ मामलों में यही सबसे बड़ा है। इन फर्जी मार्कशीट के जरिए प्रदेश में दो हजार से ज्यादा सहायक अध्यापक बने हैं। एसआईटी जांच पूरी कर चुकी है। विवि के कुलपति को फर्जी मार्कशीट का ब्योरा भी दे दिया गया था। उन्होंने कार्रवाई नहीं की।
तब यह ब्योरा हाईकोर्ट के सामने रखा गया। हाईकोर्ट के आदेश पर ही एसआईटी की जांच शुरू हुई थी। एसआईटी के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि चार हजार फर्जी मार्कशीट का ब्योरा गोपनीय चार्ट में दर्ज किए जाने और फिर उन्हें असली बताकर सत्यापन किए जाने की जांच पूरी हो चुकी है। इसमें 30 कर्मचारियों का नाम सामने आया है। उन्हें जल्द ही आरोपी बनाया जाएगा।
विदेशों तक पहुंची है विवि की फर्जी मार्कशीट
दिल्ली में पिछले साल डाक्टर पकड़ा गया था। उसकी एमबीबीएस की मार्कशीट डा. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय की मिली। यह जांच में फर्जी पाई गई। इससे पहले अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा में प्राइवेट कंपनियों में नौकरी कर रहे 17 लोगों की मार्कशीट जांच में फर्जी मिलीं। वे भी इसी विवि की थी। हाल में आंध्र के 300 अधिकारियों और कर्मचारियों की मार्क शीट के फर्जी होने का अंदेशा सामने आया है। इसकी जांच अभी चल रही है।
नौकरी मिलना हो गया है मुश्किल
फर्जी मार्कशीट से डा. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय की साख इतनी गिर गई है कि कई कंपनियों ने इसे ब्लैक लिस्ट में डाल दिया है। इस विवि की मार्कशीट पर नौकरी नहीं दी जा रही है। हाल में ही ऐसी ही एक शिकायत भी कुलपति के पास आई थी। इसके अतिरिक्त जो प्राइवेट कंपनियां इस विवि की डिग्री पर नौकरी दे रही हैं, वे सत्यापन करा रही हैं।