गंभीर बीमारी हो सकती
जिले में प्रतिदिन बंदर करीब 300 लोगों को काट या नोंच रहे हैं। लोग सरकारी और निजी अस्पतालों में कुत्तों के काटने से कम, बंदरों के काटने के बाद रैबीज का टीका लगाने पहुंच रहे हैं। डॉ. अभिषेक के मुताबिक बंदरों के काटने अथवा नोंचने से डायरिया, अमीवाइसिस, अपच, बुखार, पेट में अल्सर-कैंसर, टीबी, लीवर में सूजन, रैबीज आदि गंभीर बीमारियां होती हैं।
फल-सब्जी नहीं उगाते किसान
किसान सुनील भारद्वाज ने बताया कि जिले में बड़ी मात्रा में खेती होती है लेकिन किसान फल और सब्जी नहीं उगा पाते है। इसका प्रमुख कारण बंदर हैं। अब मथुरा-वृंदावन शहर में ही नहीं बंदर गांवों तक पहुंच चुके हैं और खेतों में नुकसान पहुंचा रहे हैं।
गोवर्धन के समाजसेवी गौतम खंडेलवाल ने कहा कि सांसद से मिलकर मंकी सफारी की मांग की थी। वन विभाग के पास काफी जमीन है। वहां सफारी बन जाए तो श्रद्धालु वहां जाकर बंदरों को खाना खिला सकते हैं।
शिक्षिका सोनिका शर्मा ने कहा कि वृंदावन में मेरी मां सुमन शर्मा पर बंदरों ने हमला कर दिया था। पहले होली गेट पर रहती थीं। स्कूल जाते समय बच्चों पर हमला करते थे। घर छोड़ना पड़ा। बाहरी इलाके में भी बंदर आ गए हैं।
समाजसेविका राधिका गोस्वामी ने कहा कि बंदरों से निजात पाने के लिए ब्रज वृंदावन हैरिटेज अलाइव संस्था की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दायर की जा चुकी है। बंदरों के उत्पात से यहां आने वाले देशी-विदेशी श्रद्धालु हमले का शिकार हो रहे हैं।
जल्द निकाला जाएगा टेंडर- नगर आयुक्त
नगर आयुक्त रविंद्र कुमार मांदड़ ने कहा कि बंदरों की संख्या कम करने के लिए शीघ्र ही 2000 बंदरों को पकड़कर बाहरी क्षेत्र में छोड़ने के लिए टेंडर निकाला जाएगा। हर साल इतने बंदरों को टीका लगेगा तो संख्या कम हो जाएगी।
क्षेत्रीय वन अधिकारी एमके मीणा ने कहा कि केंद्र सरकार से पैसे रिलीज होने का इंतजार है। प्रतिवर्ष 2000 बंदरों को वेटरनेरी विश्वविद्यालय में टीका लगवाने के बाद दोबारा उन्हीं स्थानों पर छोड़ा जाएगा। इससे उनकी संख्या पर काबू रखा जा सकेगा।