पूछताछ में आरोपी सौरभ भारद्वाज से पता चला कि वह बैंक कर्मी रही मोनिका से डाटा लेने के लिए व्हाट्स एप पर मैसेज करता था। वह ओके लिखकर भेजती थी। इसके बाद डाटा आ जाता था। यह डाटा मेल या व्हाट्स एप पर एक्सेल फाइल में आता था। उन्होंने हाल ही में छह हजार लोगों का डाटा निकलवाया था। इन लोगों को कॉल करके जानकारी ले रहे थे।
सुराग: गैंग में बैंकों का डाटा चोरी करने वाले भी
थाना खेरागढ़ के प्रभारी निरीक्षक हंसराज भदौरिया ने बताया कि इस गैंग में बैंकों का डाटा चोरी करके उपलब्ध कराने वाले भी लोग शामिल हैं। उनकी तलाश की जा रही है। मोनिका नाम की युवती का नाम सामने आया है। वह एक ग्राहक का डाटा 35 रुपये में बेचती थी। उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। आरोपियों से बरामद मोबाइल और लैपटॉप की भी जांच की जा रही है। वह किन लोगों के संपर्क में थे? यह पता किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सौरभ और आस मोहम्मद की दो फर्जी ई कॉमर्स कंपनियों के खातों में एक करोड़ रुपये आने के बाद निकाल लिए गए थे। अकेले आस मोहम्मद की ई कामर्स कंपनी में 70 लाख रुपये जमा हुए। उसने 240 लोगों के क्रेडिट कार्ड से रकम ट्रांसफर की। सौरभ की कंपनी से खातों में 60 लोगों के 30 लाख रुपये जमा होने की जानकारी बैंक से मिली है।